राग मल्हार के साथ ओपन हार्ट सर्जरी !

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डॉक्टर, ख़ास तौर पर सर्जन, से बेहद संजीदा रहने की अपेक्षा की जाती है- कम के कम ऑपरेशन थिएटर के अंदर.

लेकिन जो हार्ट सर्जन मूड की तरह, ऑपरेशन की प्रक्रिया के मुताबिक़, गाने बदल-बदलकर सुनता हो, आप उसे क्या कहेंगे?

लेखक अमिताव कुमार ने एक दिन पटना में डॉक्टर अजित प्रधान के साथ गुज़ारा.

डॉक्टर प्रधान पटना में पहली बार ओपन हार्ट सर्जरी करने वाले डॉक्टर हैं और उनकी सर्जरी का तरीक़ा निराला है.

पढ़िए अमिताव कुमार का पूरा लेख

मैं एक दोस्त के साथ मौर्या होटल गया था. मुझे वहां डॉक्टर अजित प्रधान मिल गए. वह उस दिन इसलिए मिल पाए क्योंकि उसी शाम को तय एक दिल के ऑपरेशन को रद्द करना पड़ा था- मरीज़ का कहना था कि मंगलवार उनकी 'मां का दिन' होता है.

डॉक्टर प्रधान ने कई बार मुझे पटना के साहित्य सम्मेलन में आने को कहा था. वह नवरस सांस्कृतिक सम्मेलन के आयोजक भी हैं.

आपने उनके बारे में ज़रूर सुना होगा- वह पटना में ओपन हार्ट सर्जरी करने वाले पहले व्यक्ति हैं.

मैंने अजित को पूछा कि क्या वह ऑपरेशन करते वक्त संगीत सुनते हैं? तो उन्होंने हां में जवाब दिया और कहा कि वह अपने क्लीनिक में एक व्यक्ति को 13 हज़ार रुपए सिर्फ़ इसलिए देते हैं कि जब वह सर्जरी कर रहे हों, तो वह सीडी बदलता रहे.

मैंने फ़ैसला किया कि अगले दिन मैं वह संगीत सुनने जाऊंगा जो ऑपरेशन थिएटर में तब सुना जाता है जब एक आदमी की छाती को खोला गया हो.

बरखा रितु आई..

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मरीज़ एक 45 साल के शख़्स थे. उसका नाम गौरीशंकर शर्मा था और वह समस्तीपुर के नज़दीक एक गांव के कपड़ा विक्रेता थे. मुझे धूसर बालों से भरा उनका सिर दिखा क्योंकि छाती के सिवा बाकी शरीर हरे कपड़े से ढका था.

मुझे उनकी छाती में एक छेद दिखा, जो दो-रुपए के सिक्के के बराबर था. लेकिन यह सब बाद में.

पहले डॉक्टर प्रधान को उनका दिल चीरना था और इससे पहले कि वह काम शुरू करें, उन्होंने चिल्लाकर कहा, "दासजी, मेघ मल्हार लगाइए".

ऑपरेटिंग रूम में संजीव अभ्यांकर का संगीत "बरखा रितु आई, सलोनी पिया...चमकी बिजुरिया, हम ही डराए" गूंज रहा था.

गौरीशंकर शर्मा को सुबह 9.15 बजे एनेस्थीसिया दिया गया था और असली ऑपरेशन के लिए उनकी उरोस्थि को काटने में डेढ़ घंटा और लगा.

जब डॉक्टर प्रधान ने शर्मा के दिल पर काम करना शुरू किया, उन्होंने कहा, "यह मेघ मल्हार है. यह एक मौसमी राग है. इसे दिन या रात किसी भी समय गाया जा सकता है."

मैं उस व्यक्ति के पास गया जिसने संगीत शुरू किया था. उनका नाम चंद्र मोहनलाल दास था. वह दरअसल एक फ़ार्मासिस्ट हैं और ऑपरेशन के दौरान दवाओं के साथ ही अन्य चीज़ों में मदद करते हैं.

मगर डॉक्टर प्रधान के क्लीनिक में उनकी विशेषज्ञता यह है कि वह संगीत के प्रभारी हैं.

..कि उस रात दिल-वहशी ने..

डॉक्टर अपने काम में डूबे थे. उनकी सहायता के लिए दल में एक जूनियर सर्जन, एक एनेस्थीसिस्ट, कार्डिएक क्लीनिकल परफ़्यूज़न की विशेषज्ञता वाले एक डॉक्टर और दो नर्सें शामिल थीं.

डॉ प्रधान ने मुझे कहा कि वह जल्द ही दिल को 'थाम' लेंगे- धड़कने से रोक लेंगे- ताकि उसका ऑपरेशन कर सकें. जिस दौरान वह यह कर रहे थे, मरीज़ को एक 'हार्ट-लंग मशीन' से जोड़ दिया जाएगा.

जब मॉनीटर में दिखा कि मरीज़ का दिल धड़कना बंद हो चुका है, अजित ने संगीत बदलने को कहा.

अब हम मालिनी राजुकर को सुन रहे थे. 'हटो छोड़ो मोरी बइयां मोरी नरम कलाई कहे मरोड़ी, जिन्हें डॉक्टर हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की सबसे अच्छी गायिका मानते हैं.

मरीज़ के शरीर का तापमान उनके खून को ठंडा करके कम कर दिया गया था. स्टर्लाइज़्ड चिमटियों की अबाध आपूर्ति एक हाथ से दूसरे को होती रही. खून प्लास्टिक पाइपों में से गुज़रता रहा.

डॉ प्रधान अपना काम करते रहे लेकिन इसके साथ ही उन्होंने मुझे फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की नज़्म 'हार्ट अटैक' की कुछ पंक्तियां भी सुनाईं.

"दर्द इतना था/दर्द इतना था कि उस रात दिल-वहशी ने/ हर रगे-जान से उलझना चाहा..."

आपकी याद आती रही...

क़रीब 11.35 तक शर्मा जी के दिल की मरम्मत की जा चुकी थी और 'क्रॉस-क्लैंप' को हटाया जा चुका था. वह एक बार फिर धड़कने लगा था.

मालिनी राजुकर अब भी बेहद ख़ूबसूरती से गा रही थीं लेकिन जब डॉक्टर ने मरीज़ की सिलाई शुरू की तो उन्होंने दास को कुछ फ़िल्मी संगीत लगाने को कहा.

लेकिन वह सीडी मिली नहीं. अब जो संगीत लगाया गया वह टीना सामी की आवाज़ में 'आपकी याद आती रही, रात भर...' था.

दोपहर तक डॉक्टर प्रधान अपना काम निपटा चुके थे. एक दुबला-लंबा जूनियर डॉक्टर गौरीशंकर शर्मा की उरोस्थियों को सिलने आ गया था.

उस गाने ने मुझे भावुक कर दिया. मैं सोचने लगा कि जागने पर गौरीशंकर शर्मा का हाथ अपने दिल पर जाए और उन्हें वहां एक नई धुन मिले.

बाद में डॉक्टर प्रधान ने मुझे बताया कि कई साल पहले उन्होंने कवि काशीनाथ पांडे के दिल का ऑपरेशन किया था.

उन्होंने डॉक्टर प्रधान से कहा, "जब आप मेरा सीना खोलें, तो कृपया राग केदार लगा दें. तब मैं ठीक रहूंगा."

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