सानिया मुद्दे पर लक्ष्मण जी से सहमत हूँ

  • 28 जुलाई 2014
सानिया मिर्जा और शोएब मलिक इमेज कॉपीरइट Star Plus

सानिया मिर्ज़ा को तेलंगाना राज्य का ब्रांड अम्बेसडर बनाए जाने को लेकर भाजपा नेता के लक्ष्मण की आपत्ति पर पार्टी और उनकी सफ़ाई आ चुकी है.

लेकिन देसी होने का सवाल आख़िर उठ ही रहा है क्यों? मुख्यमंत्री से लेकर भारत के पूर्व राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक ने विदेशियों से शादी की लेकिन वे राजनीति में बने रहे.

एक जमाने में बॉलीवुड की रीढ़ माने जाने वाले दिलीप कुमार और कपूर खानदान तो पेशावर से ही आया था. यहां तक कि ख़ुद भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी पाकिस्तान से आए हैं.

ऐसे में खांटी 'देसी' की लक्ष्मण की मांग को कहां तक उचित ठहराया जा सकता है?

पढ़िए वुसतुल्लाह ख़ान का ब्लॉग

अबतक मैं केवल कार्टूनिस्ट आरके लक्ष्मण को जानता था लेकिन पिछले एक हफ़्ते से तेलंगाना के भाजपा नेता के लक्ष्मण का मुरीद हो गया हूं.

हालांकि न तो मैं लक्ष्मण जी से कभी मिला हूं और ना ही शायद सानिया मिर्ज़ा का ससुराली होने के नाते कभी मिल पाऊं.

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मैं सौ प्रतिशत सहमत हूं कि सानिया मिर्ज़ा को तेलंगाना का ब्रांड अम्बेसडर नहीं होना चाहिए क्योंकि एक तो वो असली हैदराबादी नहीं हैं बल्कि इससे भी बढ़कर कि वो पाकिस्तानी बहू हैं.

अब टेनिस की अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी सानिया मिर्जा अपने आंखों में आंसू भर भर कर लाख कहें कि वो इतने वर्षों से महाराष्ट्रियन और हैदराबादी हैं, मैं श्रीमान लक्ष्मण के साथ हूं.

मुझे लक्ष्मण के बारे में तो बहुत नहीं मालूम, लेकिन फिर मैं यह मान के चल रहा हूं कि वो द्रविड़ हैं और भारत माता के असली वारिस हैं.

अगर वो द्रविड़ नहीं है तो मैं पांच हजार साल पीछे नहीं जाना चाहता नहीं तो एक और विवाद पैदा हो जाएगा.

हां, यह बात थोड़ी आसान हो जाएगी अगर बात छह सौ साल पीछे से औरंगजेब के परदादाओं और आर्यों की तरह मध्य एशिया से आने वाले बाबर के पोते जलालुद्दीन अकबर से शुरू की जाए.

अकबर ने एक राजपूतानी जोधाबाई से शादी तो कर ली, लेकिन इस तुर्क मुगल बच्चे ने पचास साल तक बादशाह रहने के बाद भी हिंदुस्तान की नागरिकता की शपथ लेने का तकल्लुफ नहीं किया.

नज़ीर और भी हैं

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खुद के लक्ष्मण के हैदराबाद के आख़िरी बादशाह मीर उस्मान अली ख़ान भी सिर्फ आठ नौ पीढ़ी पहले ही समरकंद से हिंदुस्तान आए थे.

लेकिन इतने सदियों तक भारत में रहने के बाद भी वो अपने बेटों आज़मजा और मुअज्जमजा के लिए तुर्की से बहुएं (दुर्रेशहवार और नीलोफर) ले आए.

तो क्या पूरे हिंदुस्तान में दो कुमारियां भी नहीं थीं, जिनसे इन शहज़ादों की शादी की जा सकती थी. शुक्र है कि के लक्ष्मण जी के पिता जी या दादा जी ने निज़ाम के सामने यह शिकवा नहीं किया, वरना आज मैं किसी और लक्ष्मण पर लेख लिख रहा होता.

और क्या अन्याय है कि खुद को भारत का सुपुत्र कहने वाले बहुत से लोगों ने देश की संस्कृति का पालन नहीं किया. अब भारत के दसवें राष्ट्रपति और सेना के सुप्रीम कमांडर केआर नारायणन को ही लें, जो मा टिनटिन से शादी कर के बर्मा के दामाद बन गए.

फ़ारूख अब्दुल्लाह मोली से शादी कर ब्रिटेन के दामाद हो गए और कश्मीर जैसे अहम राज्य के न सिर्फ मुख्यमंत्री रहे बल्कि मोली के बेटे उमर को भी मुख्यमंत्री बना दिया.

राजीव गांधी का ख़ून भी फारुख अब्दुल्लाह ही तरह कश्मीरी था और इटली के दामाद बन बैठे और सोनिया जी भारतीय राजनीति की ब्रांड अम्बेसडर बन गईं.

लेकिन भोले-भाले मतदाताओं ने लक्ष्मण जी की पार्टी को जितवाकर ये दाग़ भी धो डाला. बॉलीवुड भी ऐसे उदाहरणों से भरा बड़ा है.

बॉलीवुड

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सानिया मिर्ज़ा से पहले अभिनेत्री रीना रॉय मोहसिन हसन ख़ान से शादी करके पाकिस्तान की पहली क्रिकेट बहू बनीं.

सेलिना जेटली ने ऑस्ट्रिया के पीटर हॉक से शादी रचाई, शशि कपूर जेनिफ़र कैंडल की वजह से ब्रिटेन के दामाद हो गए.

रही बात भाजपा के शहनवाज़, मुख्तार अब्बास नक़वी और उनसे भी पहले सिकंदर बख़्त की शादी की, तो इस बारे में हम इसलिए चुप रहेंगे क्योंकि हमारे गुरु लक्ष्मण भी चुप हैं.

अब समय बदल गया है. अब सिर्फ़ उसी को ब्रांड अम्बेसडर होना चाहिए जिसे गुरु लक्ष्मण असली देसी होने का तमग़ा दे दें.

सानिया मिर्ज़ा का कहना है कि उनके परदादा छठवें निज़ाम के दौरान शाही कर्मचारी थे, लेकिन इससे क्या होता है.

आदरणीय लक्ष्मण जी, पेशावर के दिलीप कुमार और कपूर फ़ैमिली के बारे में क्या आदेश है?

पाकिस्तान कनेक्शन

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और खुशवंत सिंह सरगोदवी, कुलदीप नैयर, आईके गुजराल सियालकोटी, गुलज़ार जेहलवी, मनमोहन सिंह चकवाली, भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी और स्वर्गीय केआर मलकानी वगैरह को किस पायदान पर खड़ा करें.

ये शरणार्थी लोग तो अभी 60 साल पहले ही देसी बने थे.

अब सूचना मिली है कि गुरु लक्ष्मण ने कहा है कि मीडिया ने उनके बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया है. उनका वो मतलब नहीं है जो निकाल लिया गया.

अरे गुरुजी! गज़ब न करें, जो कहा उसपर डटे रहें और जो नहीं कहा है उसपर भी डटे रहें. वरना मुझ जैसे करोड़ों लोगों का क्या होगा जो बिल्कुल आप ही की तरह सोचते हैं.

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