विकासशील बिच्छू और भारत-पाक बजट

  • 4 अगस्त 2014
काला बिच्छू

बहुत दिनों से मैं सोच रहा था कि अपने सुनने और पढ़ने वाले शुभचिंतकों को मैं क्या तोहफ़ा दूं. सो अचानक नेट की सर्फ़िंग करते वक्त एक इश्तेहार दिख गया.

काले बिच्छू पकड़कर लाइए और करोड़ों-अरबों रुपये कमाइए. 10 से 15 ग्राम का बिच्छू 15 हज़ार रुपये में, 40 ग्राम का बिच्छू एक लाख में, 75 ग्राम का बिच्छू एक से तीन करोड़ में और 200 ग्राम का बिच्छू 100 से 500 करोड़ में.

सौदा नक़ेदो-नक़द. इस हाथ काला दे, उस हाथ करोड़ों ले.

हालात ये हैं कि इन दिनों पाकिस्तान में भले वह सिंध का ज़िला थट्टा हो, कि बादीन, कि मीरपुर ख़ास या थार. पंजाब का ज़िला रहीमयार ख़ान या उसके साथ लगा चोलिस्तान मरुस्थल हो या कश्मीर का ज़िला मीरपुर - जिसे देखो सूरज निकलने से पहले टोकरा उठाए काले बिच्छू की तलाश में मारा-मारा फिर रहा है.

मीरपुर में तो एक बिचौलिए ने यह इश्तेहार भी निकाल दिया कि 50 ग्राम का बिच्छू लाइए और 1,000 सीसी की सुज़ूकी गाड़ी में बैठकर घर जाइए.

बिच्छू बजट

पंजाब के शहर टोबा टेक सिंह से सूचना है कि एक साहब ने तो काले बिच्छुओं की फ़ार्मिंग भी शुरू कर दी है. वह कम वजन वाले बिच्छू सस्ते में ख़रीदते हैं और खिला-पिला कर वज़न बढ़ाते हैं फिर आगे बेच देते हैं.

इस सारी कहानी के पीछे यह कहानी चल रही है कि गोरे लोग कैंसर और एड्स की दवा की तैयारी में काले बिच्छू के ज़हर का इस्तेमाल कर रहे हैं और मुंहमांगे दाम दे रहे हैं.

कुछ साल पहले ऐसी ही कहानी गेको छिपकली के बारे में भी शुरू हुई थी जिसकी खाल पर चीते की तरह काले धब्बे होते हैं.

एक 75 ग्राम की चीता छिपकली लाइए और तीन करोड़ कमाइए.

लेकिन अब चीता छिपकली की मार्केट को काले बिच्छू ने चित कर दिया है. जैसे चीता छिपकली ने सांडे के तेल को चित कर दिया था.

इस कहानी में हक़ीक़त क्या है और फ़साना कितना है इसकी परवाह किए बग़ैर वाइल्ड लाइफ़ और कस्टम कर्मचारियों के भी कान खड़े हो गए हैं और उन्होंने चेतावनी दी है कि काला बिच्छू जिसके पास से भी निकला उसे सख़्त सज़ा दी जाएगी क्योंकि वाइल्ड लाइफ़ सिर्फ़ और सिर्फ़ सरकार की मिल्कियत है.

इस ऐलान से भी बिच्छुओं को कोई ख़ुशी नहीं हुई और वह उस गोरे को कोसते हुए अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे हैं, जिसने सबसे पहले यह ख़बर उड़ाई थी कि काला बिच्छू सोने से भी महंगा.

अगर तो यह कहानी वाक़ई ऐसी है जैसा कि बताया जा रहा है तो फिर भारत और पाकिस्तान की सरकारों के तो मानो मज़े आ गए.

दो सौ ग्राम के बिच्छू की कीमत अगर 500 करोड़ है तो अगला बजट कुछ यूं बनना चाहिए.

इस बार अनाज पर 100 काले बिच्छुओं की सब्सिडी दी जाएगी. विकास योजनाओं के लिए 50 बिच्छू रखे गए हैं. आईएमएफ़ को कर्ज़े की किस्त के तौर पर 200 ग्राम के 10 बिच्छू दिए जा रहे हैं. अफ़गानिस्तान को दरियाए-काबुल पर बांध बनाने के लिए पांच काले बिच्छू चार्टर्ड फ़्लाइट से भिजवाए जा रहे हैं.

मुज़फ़्फ़रनगर के दंगों से उजड़ने वालों के घर बनाने के लिए तीन बिच्छू नीलाम किए जाएंगे.

मैं तो उस वक्त से डर रहा हूं जब राजस्थान या गुजरात या पंजाब से कोई 100 से 500 करोड़ का कोई 200 ग्राम का नामी-गिरामी बिच्छू बॉर्डर पार करके पाकिस्तान आ गया या पाकिस्तानी बिच्छू भारत की तरफ़ ख़िसक लिया तो पहचाना कैसे जाएगा और वापिस कौन करेगा?

बेहतर होगा कि दोनों देश अभी ही से अपने-अपने बिच्छुओं की गिनती शुरू करके उनपर कोई निशानी, पेंट करना शुरू कर दें, इससे पहले कि अच्छे दिन वाक़ई आ जाएं.

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