हंगामा है क्यों बरपा बीमा संशोधन बिल पर?

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बीमा क्षेत्र में सरकार बदलाव लाना चाहती है जबकि उसे कड़े विरोध का सामना करना पड़ रह है, जानिए ज़रूरी बातें.

क्या हो रहा है?

मोदी सरकार के बीमा संशोधन बिल के तहत बीमा क्षेत्र में सीधे विदेशी निवेश की सीमा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है.

(सियासी दल करा रहे हैं बीमा)

इसके प्रावधान के तहत विदेशी कंपनियों को उन कंपनियों में निवेश करने की इजाज़त होगी जो बीमा कंपनियों का बीमा करती हैं.

नए क़ानून के लागू होने से बीमा कंपनियां विदेशी और स्थानीय निवेशकों के ज़रिए पूंजी जुटा सकती हैं.

क्यों हो रहा है विरोध?

बीमा कर्मचारी यूनियनों का आरोप है कि विदेशी पूंजी निवेश से सरकारी बीमा कंपनियों को नुक़सान पहुंचेगा.

(इलाज का बीमा क्यों नहीं)

भारतीय बीमा बाज़ार में जीवन बीमा निगम का हिस्सा दो तिहाई है, विपक्ष का आरोप है कि सरकार की पहल से देसी बीमा कंपनियाँ कमज़ोर होंगी.

उनका आरोप है कि भारत में नए बीमा विधेयक को मंजूरी मिलती है तो यह निवेशकों के हितों से गंभीर समझौता होगा.

उनका ये भी कहना है कि इस क़दम से दीर्घकालिक निवेश की सुरक्षा कम हो सकती है क्योंकि निजी कंपनियाँ अधिक जोखिम वाले क्षेत्रोे में पैसा लगा सकती हैं.

बीमा कंपनियों पर असर

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मौजूदा क़ानून के मुताबिक़, भारत सरकार के नियंत्रण में चलने वाली चार बीमा कंपनियाँ स्टॉक मार्केट से पूंजी नहीं जुटा सकती हैं.

(असर बीमा कंपनियों पर भी)

नया क़ानून इन कंपनियों को इसकी इजाज़त देता है. भारत में 27 सामान्य बीमा कंपनियां हैं, जबकि 24 जीवन बीमा की, इनमें से अधिकतर की साझेदारी किसी विदेशी कंपनी के साथ है.

कहा जाता है कि भारत की नई बीमा कंपनियों को अपना व्यवसाय फैलाने के लिए विदेशी पूंजी की ज़रूरत है जो इसी तरह से आ सकती है.

आपके जीवन पर क्या अंतर पड़ेगा?

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बीमा लेने वालों के लिए आसानी यह होगी कि प्रतिस्पर्धा के कारण उन्हें बीमा कंपनियों से बेहतर सुविधाएं मिलेंगी.

कुछ लोगों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के आने से सेवा के स्तर में सुधार आएगा, हालाँकि कई विदेशी कंपनियाँ भारत में पहले ही सक्रिय हूँ.

नए क़ानून के बाद दूसरी बड़ी कंपनियां भी भारत में निवेश कर सकती हैं.

स्वास्थ्य बीमा में बदलाव

अभी तक स्वास्थ्य बीमा को सामान्य बीमा की श्रेणी से अलग रखा गया है.

नए क़ानून में अब इसे सामान्य बीमा की श्रेणी मई लाया जा रहा है, जिसकी वजह से इस क्षेत्र में नई विदेशी कंपनियां आ सकती हैं.

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