नौकरी तो गई, अब वेतन की चिंता

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केरल के कोच्चि एयरपोर्ट पर लीबिया से वापस लौटीं 44 नर्सें भले ही सुरक्षित वापसी पर इत्मीनान महसूस कर रही होंगी लेकिन बकाया वेतन न मिलने की वजह से उनके चेहरे पर उदासी के भाव साफ देखे जा सकते थे.

(भारतीय नर्सों की रोजीरोटी खतरे में)

कोच्चि पहुँचने पर नैंसी एलिज़ाबेथ बेबी ने बीबीसी हिंदी से कहा, "हमने कड़ी मेहनत की थी. लेकिन इसके बावजूद चार महीनों से हमारा वेतन नहीं मिला है. हममें से कुछ का दो महीनों का वेतन बाकी है."

जब कुछ नर्सों ने अपने बक़ाये वेतन को लेकर सवाल पूछा तो उन्हें कहा गया कि उन्हें इसका भुगतान कर दिया जाएगा.

वेतन नहीं

लेकिन ट्यूनीशिया पहुँचते ही उन्हें पीछे ठहर गईं नर्सों से विरोधाभासी जानकारी मिली. इन नर्सों को सड़क के रास्ते त्रिपोली से ट्यूनीशिया ले जाया गया था.

(लीबिया में फँसी भारतीय नर्सें)

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नैंसी कहती हैं, "घर की आर्थिक दिक्कतों की वजह से त्रिपोली में ठहर गईं नर्सों ने हमें फोन किया था. उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रशासन ने उनसे कहा है कि वे कम से कम अगले चार महीने तक वेतन नहीं दे पाएंगे. वे चाहें तो हमारी तरह ही वापस लौट सकती हैं."

त्रिपोली मेडिकल सेंटर में काम कर रहीं 350 भारतीय नर्सों में कम से कम 200 नर्सो ने लीबिया छोड़ने का फैसला किया था. वतन वापस लौटने वाली नर्सों का दूसरा दल बुधवार या गुरुवार को भारत पहुँच सकता है.

आर्थिक स्थिति

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Image caption तस्वीर में बाएं से दूसरी रॉस्मिन हैं और दाहिने से दूसरी नैंसी हैं.

नैंसी ने बताया कि जो नर्सें त्रिपोली में ही रह गई हैं, उनके घर की आर्थिक स्थिति बेहद ख़राब है. वे पढाई के लिए लिया गया कर्ज़ अभी तक नहीं चुका पाई हैं. उनका कहना है कि प्लेसमेंट एजेंसियों ने उन लोगों से लीबिया में काम दिलाने के बदले दो से ढाई लाख रुपये तक लिए हैं.

(लीबिया की संसद पर भारी गोलाबारी)

लेकिन जब नैंसी से ये पूछा गया कि अगर पिछले कुछ महीनों से जब उन्हें वेतन नहीं मिल रहा था तो उन्होंने अपना गुज़ारा किस तरह किया.

इस सवाल पर नैंसी कहती हैं, "जिनके पास भी थोड़ी बहुत बचत थी, हमने उनसे उधार लेकर अपना काम चलाया. हम मिलजुल कर अपना काम चला रहे थे. अपने घर वालों को इसके बारे में बता नहीं सके."

लेकिन रॉस्मिन और अन्य कई नर्स खुश थीं क्योंकि वे सुरक्षित वापस लौट आई थीं. उन्होंने कहा, "वहाँ हालात बहुत खराब थे. हम नहीं जानते थे कि हम बच पाएंगे या नहीं."

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