सूत ना कपास, जुलाहों में लट्ठम-लट्ठा...

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उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव वर्ष 2017 में होने हैं लेकिन भारतीय जनता पार्टी में 'कौन बनेगा उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री', की दौड़ अभी से शुरू हो चुकी है.

राजनीतिक गलियारों में जारी यह दौड़ फेसबुक पर देखी जा सकती है.

लक्ष्मीकांत वाजपेयी फॉर यूपी सीएम, योगी आदित्यनाथ फॉर यूपी सीएम के अलावा वरुण गांधी को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने की मुहिम फेसबुक पर चार समूह चला रहे हैं.

यह और बात है कि फेसबुक पर उनके चाहने वालों की संख्या न के बराबर है.

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी अपने फेसबुक दोस्तों से इतना दुखी हो गए कि उन्हें लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से लिखित शिकायत करनी पडी.

वाजपेयी तो पेज से हट गए लेकिन अभी भी लिंक पर क्लिक करने पर उनकी ही एक बड़ी तस्वीर सामने आती है.

'साज़िश की बू'

राजनीति पर नज़र रखने वालों को इसमें वाजपेयी के ख़िलाफ़ साज़िश नज़र आती है.

भाजपा के प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक कहते हैं, "फेसबुक पेज पर इस तरह की मुहिम उन नेताओं की अनुमति के बिना चलाई जा रही है. यही वजह है कि वाजपेयी जी को पुलिस से शिकायत करनी पडी."

लेकिन जब उनसे मेनका गांधी के बयान का ज़िक्र किया गया जिसमें उन्होंने अपने बेटे वरुण को मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार बताया तो वे बोले, "सूत ना कपास, जुलाहों में लट्ठम लट्ठा...अभी से कहाँ मुख्यमंत्री बनने की बात की जा सकती है.

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वाजपेयी, वरुण गांधी और आदित्यनाथ के अलावा राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह और उमा भारती जैसे कुछ नाम हैं जिन्होंने 2012 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में चुनाव लड़ने की इच्छा ज़ाहिर की थी.

यह देखते हुए कि विधानसभा चुनाव 2017 में होने हैं, भाजपा में मुख्यमंत्री बनने वालों की बढ़ती संख्या उस अंदरूनी कलह को दर्शाती है जिसके लिए उत्तर प्रदेश भाजपा बदनाम है.

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