भारत का बढ़ता असर कुबूल है अमरीका को

  • 10 अगस्त 2014
चक हेगल, अमरीकी रक्षा मंत्री इमेज कॉपीरइट EPA

अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी और वित्त मंत्री पेनी प्रिट्ज़कर के बाद रक्षा मंत्री चक हेगल की भारत यात्रा मोदी सरकार को लुभाने और पिछले कुछ सालों से ठंडे पड़े द्विपक्षीय रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने का ठोस प्रयास थी.

अमरीकी रक्षा मंत्री ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री अरुण जेटली और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाक़ात की और कई सार्वजनिक बैठकें की. इस दौरान उन्होंने अगले महीने नरेंद्र मोदी की अमरीकी यात्रा से पहले भारत को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

रक्षा सहयोग

भारत अपनी सेनाओं को उन्नत करने की इच्छा रखता है, जिसके तहत वह रक्षा प्रणाली और तकनीक की न सिर्फ़ ख़रीदारी करेगा बल्कि विदेशी सहयोग से इन्हें घरेलू स्तर पर ही विकसित भी केरगा.

इसे समझते हुए चक हेगल ने मेग्नेटिक कैटापुल्ट, जेवलिन मिसाइल, हॉक-21 मिसाइल समेत सात नई रक्षा प्रणालियां भारत को देने की पेशकश की.

भारत की घरेलू स्तर पर रक्षा उपकरणों के उत्पादन को बढ़ावा देने की इच्छा के मुताबिक़ हेगल ने कहा कि अमरीका रक्षा प्रणालियों के सह-उत्पादन और सह-विकास के लिए ‘पॉयलट प्लान’ ला रहा है.

उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अगले महीने अमरीका में होने वाली बातचीत के लिए भी माहौल बनाने की कोशिश की.

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इस दौरान दोनों देश कुछ समझौते कर सकते हैं जिनसे अमरीकी रक्षा उद्योग को कुछ नए ऑर्डर मिल सकते हैं.

चीन का सवाल

हेगल ने भारत की स्थिति को भी समझा कि अमरीका के साथ रिश्तों में सुधार चीन के साथ बढ़ रही नज़दीक़ियों की क़ीमत पर नहीं हो सकता.

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एक सार्वजनिक समारोह में उन्होंने कहा कि अमरीका ‘या हम या वो’ वाली सोच नहीं रखता.

हालांकि उन्होंने अमरीका, भारत और जापान के बीत तीन स्तरीय सहयोग बढ़ाने की बात ज़रूर कही पर उन्होंने यह भी साफ़ किया कि इसका मतलब चीन का विरोध नहीं है.

एशिया में भारत

हेगल ने यह भी कहा कि अमरीका क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अफ़ग़ानिस्तान में भारत की भूमिका को स्वीकार करता है. यह कहकर उनका मक़सद भारत को शांत करना ही था क्योंकि 2011 में ख़ुद ही कह चुके थे कि, “भारत ने हमेशा अफ़ग़ानिस्तान का दूसरे मोर्चे की तरह इस्तेमाल किया है और सीमा के उस पार से पाकिस्तान में समस्याओं को प्रायोजित करता रहा है.”

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हेगल ने कहा कि अमरीका न सिर्फ़ अफ़ग़ानिस्तान बल्कि एशिया में और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा ढांचे में भारत की बड़ी भूमिका देखता है. यह सुनना बीजेपी नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को ज़रूर अच्छा लगा होगा.

हाल के दिनों में भारत आए अमरीकी अधिकारियों के बयान और अमरीका के इरादे ज़ाहिर करते हैं कि ओबामा प्रशासन खासकर नरेंद्र मोदी और सामान्य तौर पर भारत सरकार को लेकर पुरानी कड़वाहट भूलने के लिए प्रतिबद्ध है.

अमरीका को अपने उद्योगों के लिए ऑर्डर पाने और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए भारत की ज़रूरत है और अमरीका अब इसमें भारत की बड़ी भूमिका देखता है.

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