क्या कश्मीर मुद्दे से बच रहे हैं मोदी?

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नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद तीन महीने के अंदर दूसरी बार जम्मू-कश्मीर पहुंचे लेकिन उन्होंने कश्मीर मुद्दे पर टिप्पणी नहीं की और न ही अनुच्छेद 370 को लेकर बोले.

करगिल में मंगलवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी ने जम्मू-कश्मीर में सड़कों के लिए 8,000 करोड़ देने का वादा किया और भ्रष्टाचार ख़त्म करने की प्रतिबद्धता जताई.

इससे पहले मोदी जब जम्मू-कश्मीर आए थे तब उन्होंने कहा था कि वह लोगों के दिल जीतना चाहते हैं और ऐसा सिर्फ़ विकास के ज़रिए संभव है.

अपनी दोनों ही यात्राओं में मोदी ने कश्मीर मुद्दे को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की और न ही भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 का कोई ज़िक्र किया.

चुनाव अभियान के दौरान मोदी ने जम्मू में एक सभा में कहा था कि भाजपा सत्ता में आने पर अनुच्छेद 370 की उपयोगिता को लेकर बहस की शुरुआत करेगी. इस अनुच्छेद के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा हासिल है.

'कश्मीर की हक़ीक़त मानें'

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ऐसा लगता है कि मोदी अब जानबूझकर कश्मीर से जुड़े राजनीतिक मुद्दों से बच रहे हैं. वह बार-बार ये कहते रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर और उत्तर पूर्व की समस्याओं का हल सिर्फ़ विकास में है.

हालांकि अलगाववादी गुट इससे प्रभावित नहीं दिखते.

हुर्रियत के उदारवादी धड़े के चेयरमैन मीरवाइज़ उमर फ़ारुक ने कहा कि भारत सरकार को कश्मीर की हक़ीक़त माननी चाहिए और मुख्य मुद्दों से हटकर विकास का शोर करने के रवैये को छोड़ देना चाहिए.

उन्होंने कहा, “सच्चाई की जगह सड़कें और पुल नहीं ले सकते. कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए गंभीर सोच-विचार की ज़रूरत है.”

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