दही हांडी पर मिला 'दुख भुलाए नहीं भूलता'

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मुंबई के एलफ़िन्स्टन इलाक़े में रहने वाले दयानंद भादवनकर नवी मुंबई में एक निजी कंपनी में नौकरी किया करते थे.

उन्हें दही हांडी उत्सव में शरीक होना अच्छा लगता था और वह एक जाने-माने गोविंदा थे. अपने मंडल के बेहतरीन गोविंदाओं में से एक.

दही हांडी उत्सव से आमदनी के साथ-साथ शोहरत भी खूब मिल रही थी लेकिन साल 2008 के उत्सव के बाद दयानंद के जीवन में ऐसा दौर आया कि उनकी और उनके परिवार की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल गई.

उस साल दही हांडी तोड़ते वक़्त दयानंद सांतवें स्तर पर थे कि अचानक किसी का संतुलन बिगड़ गया और पूरी की पूरी मंडली ज़मीन पर आ गिरी.

इस हादसे में दयानंद की रीढ़ की हड्डी में चोट आयी और वह हमेशा के लिए विकलांग हो गए.

पढ़िए पूरी कहानी

किसी ज़माने में दही हांडी उत्सव में पलक झपकते ही सात-आठ स्तर चढ़ जाने वाले दयानंद आज दो क़दम भी बड़ी मुश्किल से चल पाते हैं.

उस वाकये को याद करके आज भी दयानंद की आंखें नम हो जाती हैं. उनके माता-पिता के आंसू तो रुकने का नाम नहीं लेते. इस घटना के बाद दयानंद की नौकरी चली गई.

पिता के रिटायरमेंट के बाद परिवार की माली हालत भी खस्ता हो गई है.

सावधानी

बीबीसी से बातचीत में दयानंद ने कहा, "दही हांडी बहुत अच्छा उत्सव है. लेकिन इसे कुछ नियम तथा सुरक्षा के साथ मनाना बेहद ज़रूरी है."

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उन्होंने कहा, "मुंबई उच्च न्यायालय ने इस बारे में जो आदेश दिया है वह सराहनीय है. मैं इसका स्वागत करता हूं. यह पहले किया जाना चाहिए था. मैं सिर्फ़ इतना चाहता हूं कि जो दुख और यातनाएं मैंने सही है वह किसी और के नसीब में न आए."

अब तक अनगिनत युवाओं ने इस उत्सव में अपनी जान गंवाई है और कई बुरी तरह घायल हुए जिनमें से कई स्थाई रूप से विकलांग हो चुके हैं. ये सभी मध्यम वर्गीय परिवारों से हैं.

हादसों के बाद इन युवाओं के साथ-साथ उनके परिवार भी आहत हुए हैं.

दयानंद ने कहा, "जब कोई गोविंदा दही हांडी में घायल होता है या जान गवांता है तो इस व्यक्ति का पूरा परिवार प्रभावित होता है. इन हादसों के बाद की ज़िंदगी नर्क से भी बदतर हो जाती है,".

उन्होंने सभी गोविंदाओं से उत्सव के दौरान पूरी सावधानी बरतने की अपील की.

घायल

मुंबई से सटे भिवंडी के रहने वाले नागेश भोईर साल 2009 में दही हांडी में घायल हुए थे. वह आज तक बिस्तर पर हैं.

हालांकि उनका परिवार और दोस्त उन्हें फिर से अपने पैरों पर खड़ा करने की पुरजोर कोशिश कर रहे है.

ठाणे के पांचपाखाडी इलाक़े में रहने वाले किशोर गुणीजन पिछले कुछ सालों से दही हांडी उत्सव में शरीक होने वाली गोविंदा मंडली की व्यवस्था का काम देखते हैं.

वह ख़ुद एक गोविंदा रह चुके हैं और दही हांडी उत्सव में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते थे.

उन्होंने कहा, "दही हांडी मूलतः बच्चों का खेल है. भगवान श्रीकृष्ण के बचपन की शरारतों में से एक दही हांडी है. इसमें बच्चों का शरीक होना स्वाभाविक है लेकिन उनकी सुरक्षा सर्वोपरि है."

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गुणीजन कहते हैं, "मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई इलाक़े में जितने भी लोग गोविंदाओं का मार्गदर्शन करते हैं, वे सब बच्चों की सुरक्षा के प्रति बेहद सजग होते हैं. उनके अभिभावक बड़े विश्वास के साथ बच्चों को हमें सौंपते हैं, तब उनकी सुरक्षा हमारी ज़िम्मेदारी बन जाती है."

आदेश

गुणीजन के साथ दही हांडी उत्सव में शरीक होने वाले आनंद कांबले कहते हैं, "पिछले साल तक गोविंदाओं की भूमिका में बच्चों का होना आम बात थी लेकिन अब उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद यह मुमकिन नहीं है.

उन्होंने कहा, "मैं बचपन से इस आयोजन का हिस्सा रहा हूं और जानता हूं कि सारे लोग बच्चों की सुरक्षा के प्रति सजग होते हैं. अगर किसी मंडली में बच्चा हो तो दही हांडी के दौरान उसका ख़ास ध्यान रखा जाता था. बच्चों को हेलमेट तथा जैकेट जैसी सुरक्षा मुहैया कराई जाती थी."

जहाँ एक ओर आम लोगों ने उच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत किया है, वहीं दही हांडी का आयोजन करने वाले राजनेताओं में इसे लेकर अलग-अलग राय है.

इस आदेश के बाद शिव सेना के विधायक प्रताप सरनाइक ने अपना आयोजन रद्द कर दिया है.

बीबीसी से बातचीत में सरनाइक ने कहा, "उच्च न्यायालय का यह आदेश सरकार के हलफ़नामे के बाद आया है. इस हलफ़नामे में सरकार ने ही गोविंदाओं पर 18 साल की उम्र होने की पाबंदी, हांडी की ऊंचाई 20 फ़ीट तक सीमित रखने और सुरक्षा उपकरण इस्तेमाल करने की बात कही है."

एडवेंचर स्पोर्ट का दर्जा

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उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि स्पेन की तरह भारत में भी इस खेल को एडवेंचर स्पोर्ट का दर्जा दिया जाए जिससे इसमें शरीक होने वाले खिलाड़ियों को सुरक्षा के सभी उपकरण मुहैया कराये जा सकेंगे और यह खेल नियमों के दायरे में आ जाएगा. इसके अलावा इन खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी तथा बाक़ी सुविधाएं भी मिल सकेंगी."

सरनाइक ने कहा कि हांडी की ऊंचाई 30 फ़ीट होनी चाहिए और 12 साल के ऊपर के लड़कों को इसमें शरीक होने की अनुमति मिलनी चाहिए. सरनाइक अपने संस्कृति प्रतिष्ठान द्वारा ठाणे में हर साल दही हांडी का आयोजन करते हैं.

यह मुंबई तथा ठाणे के प्रतिष्ठित आयोजनों में से एक है. मुंबई, ठाणे तथा नवी मुंबई के कई इलाक़ों से लोग वहाँ पहुँचते हैं.

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के घाटकोपर से विधायक राम कदम भी अपना आयोजन रद्द करने का मन बना चुके हैं.

उन्होंने कहा, "हम जनप्रतिनिधि हैं. न्यायालय के आदेश के ख़िलाफ़ जाने से लोगों में ग़लत संदेश जाएगा. हमें न्यायपालिका का उचित सम्मान करना चाहिए."

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