सात लोगों को मारने वाला बाघ मारा गया

  • 20 अगस्त 2014
बाघ का शव इमेज कॉपीरइट Ashwin Aghor

महाराष्ट्र के चंद्रपुर ज़िले में छह महीनों में सात लोगों की जान लेने वाला बाघ मारा गया.

मंगलवार शाम को वन और पुलिस विभाग के लोगों ने उसे मार दिया.

महाराष्ट्र के मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव) सर्जन भगत ने बीबीसी से कहा, "बाघ की दहशत की वजह से यहाँ के लोग और नेता उसे मारने की मांग कर रहे थे. इसे देखते हुए बाघ को मारने का आदेश दिया गया."

वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के मुकेश भंदककर, इस बाघ को ढूंढ़ने में पुलिस और वन विभाग की मदद कर रहे थे.

लोगों को मिली राहत

भंदककर ने बताया, ''दो-दो शार्प शूटर्स की तीन टीमें बनाई गई थीं. ये टीमें मंगलवार सुबह से बाघ की तलाश कर रही थीं. शाम पांच बजे के करीब यह बाघ आंबेधनोरा गाँव के पास दिखा. इसके बाद पुलिस के जवानों ने उसे क़रीब साढ़े छह बजे मार दिया.''

बाघ के मारे जाने के बाद पोम्भुर्ना गाँव के निवासी संजय मुरंडे ने बताया, "इलाके के आठ गाँव इस बाघ की दहशत में थे. अब हम चैन की सांस ले सकते हैं."

'नरभक्षी नहीं'

मध्य चांदा वन विभाग के उप वन संरक्षक गजेंद्र हिरे ने बताया, "इस बाघ ने सात लोगों को मारा था. लेकिन उसे नरभक्षक नहीं कहा जा सकता, क्योंकि उसने अपने किसी भी शिकार को खाया नहीं था."

उन्होंने कहा कि ये सभी हमले उस समय हुए जब गाँव के लोग किसी न किसी काम से जंगल में गए थे.

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उन्होंने बताया कि पहले उसे बेहोश कर किसी और इलाक़े में छोड़ने की योजना बनाई गई थी लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली.

(पढ़िए : आवारा कुत्ते बन रहे हैं बाघों के लिए ख़तरा)

चंद्रपुर के ग्रीन प्लैनेट सोसाइटी के अध्यक्ष सुरेश चोपने ने बाघ को मारने का विरोध करते हुए कहा कि इस मसले को और परिपक्व तरीके से हल किया जा सकता था. बाघ को मारना कोई स्थायी समाधान नहीं हो सकता है.

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