जेटली का बयान कांग्रेस ने लपका

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साल 2012 के दिसंबर में दिल्ली सामूहिक बलात्कार कांड को लेकर केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के बयान पर विवाद गहरा गया है.

उन्होंने कहा था कि 'बलात्कार की एक छोटी सी घटना' की वजह से देश को लाखों डॉलर का घाटा उठाना पड़ा, जिसका दुनिया भर में प्रचार-प्रसार किया गया.

जेटली गुरुवार को दिल्ली में राज्यों के पर्यटन मंत्रियों के सालाना सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे.

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर जहां जेटली से माफ़ी मांगने को कहा है, वहीं जेटली का कहना है कि उनके बयान को ग़लत तरीक़े से पेश किया गया.

महिला कांग्रेस नेता शोभा ओझा के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को जेटली के घर के बाहर प्रदर्शन किया और उनसे कहा कि वह बयान पर माफ़ी मांगें.

जेटली को 'खेद'

16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में गैंगरेप की शिकार हुई छात्रा के माता-पिता ने जेटली के इस बयान पर गहरी नाराज़गी जताई है.

जेटली ने अपने भाषण में इसी घटना का ज़िक्र किया था.

आलोचनाओं के बीच अरुण जेटली ने कहा, "अगर इससे किसी की भावना को ठेस पहुंची है तो इसका मुझे खेद है."

'ज़ख़्म कुरेदे'

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छात्रा के पिता ने एएफ़पी समाचार एजेंसी से कहा कि जेटली के शब्दों ने उनके 'ज़ख़्मों को कुरेद' दिया है.

उनका कहना था, "जो उन्होंने कहा बहुत ग़लत है. मैं बता नहीं सकता कि इससे हमें कितना आघात पहुंचा है. वह ख़ज़ाने को हुए नुक़सान की बात कर रहे हैं. मगर हमें जो नुक़सान हुआ उसका क्या. क्या उन्हें ज़रा भी पता है कि एक बलात्कार पीड़िता के परिवार को रोज़ क्या भोगना पड़ता है."

पीड़ित छात्रा की मां ने कहा, ''जब वो चाहते हैं तो निर्भया के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल करते हैं, लेकिन जब वो सत्ता में हैं, तो वो उस घटना को छोटा बता रहे हैं.''

(पढ़िए : रोज़ 92 बलात्कार, दिल्ली सबसे ख़तरनाक़)

इस मुद्दे पर महिला अधिकार कार्यकर्ता कविता कृष्णन ने कहा है, "कोई बलात्कार छोटा नहीं होता. हर बलात्कार शर्मनाक है क्योंकि यह महिला के अधिकारों का हनन करता है न कि इसलिए कि इससे पर्यटन पर असर पड़ता है."

दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को एक छात्रा से बर्बर तरीक़े से सामूहिक बलात्कार किया गया. कई दिनों तक संघर्ष करने के बाद पीड़िता ने दम तोड़ दिया था.

इस घटना के विरोध में दिल्ली समेत देश के कई इलाक़ों में कई दिनों तक व्यापक प्रदर्शन हुए थे.

अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी यह मुद्दा सुर्खियों में रहा और इससे भारत में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल भी उठे.

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