सोशल सरगर्मी: आइस बकेट का जवाब राइस बकेट

  • 25 अगस्त 2014
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फ़ेसबुक पर लंबे समय से आइस बकेट चैलेंज टॉप कर रहा था. अब सोशल मीडिया के मैदान में उतर आया है राइस बकेट चैलेंज.

आइस बकेट चैलेंज में अपने सिर पर बर्फ़ का ठंडा पानी डालना होता है और एएलएस बीमारी के प्रति जागरूकता फ़ैलाने के लिए दान देना होता है.

वहीं भारत के राइस बकेट चैलेंज को स्वीकार करने वाले को जितना संभव हो उतना चावल किसी ज़रूरतमंद को दान देना होता है. ऐसा करते हुए उसे अपनी एक तस्वीर लेना है. उस तस्वीर को फ़ेसबुक पर लगा कर अपने दोस्तों को टैग कर चैलेंज स्वीकार करने वाला उन्हें भी ऐसा ही चैलेंज दे सकता है.

इस चैलेंज को शुरू किया है हैदराबाद की एक पत्रकार मंजू लता कलानिधि ने.

मंजू लता का कहना है कि चैलेंज आइस बकेट चैलेंज का भारतीय रूप है. वैसे ज़रूरी नहीं की इस चैलेंज में कच्चा चावल ही दिया जाए. आप पुलाव बिरयानी कुछ भी दे सकते हैं. इस राइस बकेट चैलेंज की चर्चा दुनिया भर में हो रही है.

ट्विटर के बाकी ट्रेंड्स की बात करें तो बिहार लंबे समय तक टॉप ट्रेंड से एक था.

वजह चुनावी नतीजे थे जिनमे कांग्रेस, लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के महागठबंधन ने 10 में से छह सीटें हासिल की.

भाजपा विरोधी ख़ुश थे लेकिन बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट किया '' साल 2009 में बिहार में एनडीए ने लोकसभा की 32 सीटें जीतीं थी, लेकिन बाद में विधानसभा के उपचुनावों में 18 में से 13 सीटों पर हार गए. लेकिन उसके 10 माह बाद तीन-चौथाई बहुमत हासिल किया.''

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने कहा कि चुनाव परिणामों से ज़ाहिर होता है कि ''मोदी को पार्टी की ज़रूरत कम है पार्टी को मोदी की ज़रूरत ज़्यादा है''. दूसरा उन्होंने कहा कि ''उपचुनाव असली चीज़ नहीं हैं. 2015 में पता लगेगा कि चुनावी गुणाभाग है या कि राजनीतिक केमिस्ट्री.''

इसके अलावा ट्विटर पर ट्रेंड थे तमिलनाडु के फ़िल्मी सितारे और डीएमडीके नेता विजयकांत जिन्हें उनके चाहने वाले कैप्टन भी कहते हैं. अपने चाहने वालों के बीच विजयकांत की हैसियत रजनीकांत से कतई काम नहीं है.

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