बदायूं: परिजन भी शक के घेरे में

  • 29 अगस्त 2014

बदायूं की दो चचेरी बहनों की हत्या के मामले में उनके परिजन भी सीबीआई की जांच के घेरे में आ गए हैं.

पूरे मामले में उनकी भूमिका की भी जांच हो रही है.

सलमान रावी की पूरी रिपोर्ट

मामले के गवाह और परिजन 'लाई डिटेक्टर' टेस्ट में भी फ़ेल हो चुके हैं.

इसके अलावा पुलिस के सूत्रों का कहना है कि दोनों बहनों में से एक के पास मोबाइल फ़ोन था जो घटना के बाद परिजनों के ही पास था.

बाद में जब सीबीआई ने फ़ोन माँगा तो वो टूट चूका था और उसकी 'मेमोरी' पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी.

बीबीसी से बात करते हुए दोनों बहनों में से एक के पिता सोहन लाल का कहना था कि उन्होंने फ़ोन को ग़ुस्से में पटक दिया था जिससे वो टूट गया.

गाँव के प्रधान कमलकांत तिवारी कहते हैं कि घटना के पहले दिन युवतियों के परिजन पुलिस को भी लाशों के पास नहीं जाने दे रहे थे. उनके अनुसार पुलिस के बड़े अधिकारी आने के बाद ही लाशों को उतारा गया.

गवाह को दिए पैसे

इस बात की भी जांच चल रही है कि घटना के एकमात्र गवाह के बैंक खाते में एक बड़ी रक़म क्यों जमा करवाई गई. लड़कियों के परिजनों का कहना है कि चूँकि गवाह ग़रीब है और उसे पैसों की ज़रूरत थी इसलिए उन्होंने उसकी मदद की.

हालांकि अब जांच में पेंच फसने के बाद सोहनलाल का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें 'नज़रबंद' कर रखा है.

डीएनए की रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि नहीं होने के बाद से पूरे मामले में एक नया मोड़ आ गया है और अब यह मामला और भी ज़्यादा पेचीदा होता चला जा रहा है. किसकी भूमिका क्या रही, अब तो यह जांच पूरी होने तक ही पता चल पाएगा.

कुछ ही मीटर की दूरी पर अभियुक्तों में से तीन भाइयों का घर हैं जहाँ उनके पिता बीरे यादव ने बातचीत के दौरान कहा कि पैसों की तंगी के कारण उन्होंने अपने बेटों को छुड़वाने की लिए अभी वकील तक नहीं किया है.

तीनों बेटे जेल में

मगर उनकी बात में भी जांचकर्ताओं को दम नहीं लगता क्योंकि जिसके तीनों के तीनों बेटे जेल में बंद हो वो उन्हें छुड़वाने का प्रयास न करे तो यह भी अटपटा सा ही है.

Image caption बीरे यादव के तीनों बेटे मामले में अभियुक्त हैं और फिलहाल जेल में हैं.

बीरे यादव कहते हैं, "हमने तो सबकुछ भगवान पर छोड़ दिया है. मेरे बेटे निर्दोष हैं और उनकी मदद भगवान ही करेगा."

बीरे यादव कहते हैं कि उन्हें घटना के बारे में अगले दिन पता चला जब पुलिस उनके बेटों को गिरफ़्तार कर चुकी थी. उनका कहना है कि उन्हें अपने बेटों से इस बारे में बात करने का मौक़ा भी नहीं मिला.

वो यह भी दावा करते हैं कि घटना की बाद से वो अपने बेटों से मिलने जेल तक नहीं गए हैं. इसे भी गाँव के लोग अस्वाभाविक मान रहे हैं.

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