30 साल में 1500 'बेगुनाहों की हत्या'

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सुप्रीम कोर्ट में रखी गई सेना को विशेषाधिकार देने वाला क़ानून या अफ़स्पा से जुड़ी जांच रिपोर्टों से पता चला है कि मणिपुर में कई लोगों की गोली मारकर हत्या की गई.

ऐसी दस न्यायिक जांच रिपोर्टें बीबीसी के पास हैं, जिनमें 22 लोगों के मारे जाने की बात कही गई है.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि 80 के दशक के मध्य से मणिपुर में अब तक 1,500 से अधिक लोगों की 'न्यायेतर हत्याएं' हुईं.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मणिपुर सरकार ने आठ अगस्त को ये रिपोर्टें पेश की थीं.

पढ़िए क्या है जांच आयोग रिपोर्टों में

न्यायिक जांच आयोगों की रिपोर्टों ने पुष्टि की है कि अधिकांश मौतों को पुलिस ने मुठभेड़ बताया और मारे गए पुरुषों-महिलाओं को 'आतंकवादी' क़रार दिया गया.

मणिपुर सरकार ने 10 न्यायिक जांच आयोग बनाए थे और अदालत ने 15 और जांच आयोग बनाने का निर्देश दिया था.

इनमें तैनात सेवानिवृत्त और कार्यरत जजों की राय थी कि मुठभेड़ों के दौरान मारे गए अधिकांश बेगुनाहों को 'आतंकवादी' क़रार दिया गया था.

मणिपुर की विधवाएं

ऐसी एक घटना में रेनू थाकेलाम्बाम ने अपने पति को खो दिया.

रेनू ने बीबीसी को बताया, ''मेरे पति और दो और दोस्त बाज़ार से लौट रहे थे. वे दोपहिए वाहन पर थे और क़रीब घर पहुंच ही गए थे. तभी एक चेकपोस्ट पर पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की. दोस्तों में एक के पास शायद ड्रग थी, इसलिए वे रुके नहीं.''

वह बताती हैं, ''पुलिस ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. यह जगह मेरे घर के इतनी पास थी कि मुझे भी गोलियों की आवाज़ सुनाई दे रही थी, पर मैंने कल्पना भी नहीं की थी मेरे पति पर गोलियां दाग़ी जा रही हैं.''

रेनू अब एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल एक्ज़ीक्यूशन विक्टिम्स एसोसिएशन ऑफ़ मणिपुर (ईईवीएएम) नामक संगठन की मुखिया हैं.

मानवाधिकार मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंज़ाल्विस ईईवीएएम की ओर से इन मामलों की पैरवी कर रहे हैं.

गोंजाल्विस ने बीबीसी को बताया, ''मणिपुर सरकार जानती थी कि उनकी पुलिस और सुरक्षा बल लोगों की निर्दयता से हत्या कर रहे हैं. उन्होंने तथ्य दबाने के लिए जांच आयोग बनाए. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें ये रिपोर्ट पेश करनी पड़ी.''

गोंज़ाल्विस के मुताबिक़, ''हालांकि आयोग बने, पर एक भी दोषी पुलिसकर्मी या अर्द्धसैनिक बल के जवान को सज़ा नहीं हुई. मैंने कश्मीर के अलावा कहीं मानवाधिकार का इतना उल्लंघन नहीं देखा.''

इरोम का मिशन

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अफ़स्पा हटाने की मांग को लेकर 14 साल से अनशन कर रहीं इरोम शर्मिला को पिछले हफ़्ते अदालत के आदेश पर रिहा किया गया था.

मगर तीन दिनों के भीतर उन्हें फिर गिरफ़्तार कर लिया गया.

बीबीसी ने इस बारे में मणिपुर के उप मुख्यमंत्री गैखंगम के कार्यालय, घर पर और उनके मोबाइल फ़ोन पर कई बार फोन किया पर उनका पक्ष नहीं मिल सका.

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