75 के बाद राजनीति से सन्यास लेना चाहिए?

  • 30 अगस्त 2014
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क्या पचहत्तर साल से ऊपर के लोगों के लिए राजनीति में जगह नहीं होनी चाहिए.

पिछले दिनों नरेंद्र मोदी ने अपनी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को न सिर्फ़ अपने मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी बल्कि उन्हें पार्टी के संसदीय बोर्ड में भी नहीं रखा.

कांग्रेस के महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने भी पार्टी में युवा नेताओं को महत्वपूर्ण पद दिए जाने की जरुरत पर ज़ोर दिया है.

क्या अनुभव की राजनीति में कोई जगह नहीं है?

क्या बुजुर्ग नेताओं को 75 वर्ष की आयु पार कर लेने के बाद स्वयं राजनीति से सन्यास ले लेना चाहिए?

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