मोदी: 100 दिन आगे, 10 क़दम पीछे

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मोदी सरकार के सौ दिनों की 10 ऐसी बातें जो मोदी या भाजपा के पुराने रुख़ से विपरीत थीं.

1. डीज़ल की क़ीमतें

यूपीए सरकार को डीज़ल की कीमतें बढ़ाने पर कोसने वाली भाजपा खुद भी हर महीने इसकी क़ीमतें बढ़ा रही है.

(पढ़िए: मोदी सरकार: 100 दिन, 10 क़दम)

2. निहाल चंद पर चुप

सूर्यनेल्ली गैंगरेप मामले में केरल से कांग्रेस नेता पीजे कुरियन इस्तीफ़ा मांगने वाली भाजपा, अपने मंत्री निहालचंद पर लगे ऐसे ही आरोप पर ख़ामोश है.

3. एफ़डीआई

बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में रीटेल में एफ़डीआई का विरोध किया था. आज बीजेपी का रूख इस पर साफ़ नहीं है.

राज्यसभा में वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने ये दोहराया ज़रूर था कि बीजेपी इसके पक्ष में नही है, लेकिन सरकार ने अभी तक इससे संबंधित पूर्व सरकार के प्रस्ताव को खारिज नहीं किया है.

4. रेल टिकटों की क़ीमतें

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यूपीए सरकार ने 2012 में बजट से पहले रेलवे टिकटों की क़ीमतें बढ़ाईं तो ट्विटर पर मोदी ने लिखा कि ‘संसद की मंज़ूरी’ लिए बग़ैर किराया बढ़ाना ग़लत है. जब मोदी की सरकार बनी तो रेल बजट से पहले ही भाड़ा बढ़ाया.

5. भारत-चीन युद्ध रिपोर्ट

साल 1962 की भारत-चीन जंग पर हेंडरसन ब्रूक्स रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करने पर अरूण जेटली ने यूपीए सरकार को कोसा था. जेटली अब खुद रक्षा मंत्री हैं और रिपोर्ट ताले में ही है.

(देखिए: सौ दिन में अढ़ाई कोस चली मोदी सरकार)

6. हाफ़िज़ सईद, वैदिक और उमर फ़ारुक़

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भारत में 26/11 हमलों के आरोपी हाफ़िज़ सईद से कश्मीरी नेता मीरवायज़ उमर फ़ारुख़ के मिलने पर भाजपा ने ग़िरफ़्तारी की मांग की थी. पर जब बाबा रामदेव के क़रीबी ‘पत्रकार’ वेद प्रताप वैदिक हाफ़िज़ सईद से मिले तो भाजपा चुप रही.

7. पहले 'भ्रष्टाचारी', अब मंत्री

कांग्रेस से तीन बार सांसद रह चुके राव इंद्रजीत सिंह के खिलाफ़ भाजपा खूब लड़ी है लेकिन 2014 के चुनाव से पहले सिंह न सिर्फ़ भाजपा में आए बल्कि मोदी ने उन्हें मंत्री भी बनाया.

8. रॉबर्ट वाड्रा पर चुप

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उमा भारती ने चुनाव से पहले कहा था कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो रॉबर्ट वाड्रा के ख़िलाफ़ ज़मीन अधिग्रहण मामलों की जांच होगी और वो दोषी होने पर उन्हें जेल भेजेंगे.

आज तक रॉबर्ट वाड्रा के ख़िलाफ़ किसी जांच में तेज़ी नहीं आई.

9. जीएसटी को हरी झंडी

जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स पर यूपीए का दस सालों तक विरोध करने के बाद मोदी ने इसे लागू करने का फ़ैसला लिया है.

10. अब आरटीआई के ख़िलाफ़

भाजपा ने हाल ही में कहा कि राजनीतिक दलों को आरटीआई के दायरे में लाए जाने से कानून का दुरुपयोग हो सकता है. साल भर पहले पार्टी इसके पक्ष में थी.

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