डॉक्टर ने भी मानी महिला की बहादुरी

महिला येलव्वा इमेज कॉपीरइट IMRAN QURAISHI
Image caption येलव्वा की बहादुरी को देखते हुए निजी अस्पताल ने उनका इलाज़ निःशु्ल्क कर दिया है.

अगर आपके पेट में शिशु पल रहा है तो क्या आप उफनती नदी को पार करेंगे. येलव्वा के सामने ये दुविधा थी लेकिन उन्हें अस्पताल पहुंचना था.

उन्होंने उफनती कृष्णा नदी को पार किया और अस्पताल पहुंची थी. अब येलव्वा ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है.

येलव्वा ने बीबीसी को बताया, ''मैं बहुत खुश हूं कि अस्पताल में उसका जन्म हुआ. उसका वज़न चार किलोग्राम है.''

कर्नाटक के यादगीर ज़िले की रहने वाली 22 वर्षीय येलव्वा का नीलकंठरायंगदा गांव बारिश के कारण पूरी तरह से कट गया था. तीन हफ्ते पहले उनके परिजनों ने उनके शरीर पर कद्दू और लौकी के सूखे हिस्से बांध दिए थे ताकि वो नदी को पार कर सके.

अपने बच्चे को अनुभवी चिकित्सकों की देखरेख में दुनिया में लाने की उनकी इच्छा ने 12 से 14 फ़ुट तक चढ़ आई नदी को पार करने की हिम्मत दी.

लेकिन उम्मीद के मुताबिक़, उनका प्रसव सामान्य नहीं रहा.

डॉक्टर भी माने बहादुरी

निजी अस्पताल के डॉ. वनमाला विजयकुमार हसरूर ने बताया, ''सर्जरी से पहले हमने भी सामान्य प्रसव के लिए इंतज़ार किया. यदि शिशु इतना भारी नहीं होता तो प्रसव सामान्य हो सकता था.''

येलव्वा ने प्रसव के लिए किसी तरह 20,000 रुपए का इंतज़ाम किया था, लेकिन अस्पताल ने उनका इलाज़ निःशुल्क करने का फ़ैसला किया है.

डॉ. हसरूर ने बताया, ''हम ग्रामीण महिला की शक्ति को कम आंकते हैं. मैंने इस बहादुर महिला का इलाज़ करते हुए रोमांचित महसूस किया.''

जैसे ही नदी का स्तर कम होगा, येवल्ला कुछ दिनों में अपने घर चली जाएंगी.

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