कई संत-महंत आदित्यनाथ के समर्थन में मुखर

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गोरखपुर से भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ की विवादित टिप्पणियों पर राजनीतिक हलकों में भले ही आलोचनाओं की बाढ़ आ गई हो लेकिन इससे हिन्दू धर्माचार्यों का एक बड़ा हिस्सा योगी के समर्थन में मुखर हो गया है.

आदित्यनाथ ने अपनी विवादास्पद टिप्पणी में कहा था कि जहां मुस्लिमों की आबादी अधिक होती है वहीं दंगे भी होते हैं.

अयोध्या के धर्मगुरुओं का दावा है कि योगी ही वो राजनेता हैं जिन्होंने, उनके मुताबिक कड़वी सच्चाई बयान करने की हिम्मत दिखाई है. हालांकि कुछ-एक संत ऐसे हैं जो इस टिप्पणी को बेहद अनुचित और दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं.

पत्रकार कुमार हर्ष ने योगी आदित्यनाथ के विवादास्पद बयानों पर अयोध्या के प्रमुख संतों और महंतों की राय जानी:

अयोध्या लम्बे समय से हिंदुत्व के आंदोलनों का केंद्र रहा है और योगी आदित्यनाथ के गुरु महंत अवैद्यनाथ ने रामजन्मभूमि आन्दोलन की अगुआई यहाँ के धर्माचार्यों के संग मिलकर ही की थी.

'लव जेहाद'

यहाँ के एक प्रमुख धर्माचार्य और रामजन्मभूमि आन्दोलन में सक्रिय रहे महंत डॉक्टर राम विलास वेदांती तो योगी के बयान से खुद को सौ फीसदी सहमत बताते हैं.

कथित लव-ज़ेहाद वाले मुद्दे पर वेदांती इतने गुस्से में नज़र आए कि उन्होंने ऐसे युवकों को 'तत्काल फांसी' देने की मांग कर डाली.

अयोध्या के मशहूर दिगंबर अखाड़े के महंत सुरेश दास कहते हैं, "योगी जी ने जो भी कहा, सही कहा है. आप पंजाब देखिए, हरियाणा देखिए, हिन्दू बहुल कोई इलाका देखिए, वहां दंगे नहीं होते. मुसलमान भी सुरक्षित रहते हैं लेकिन मुस्लिम बहुल जगहों पर परिस्थितियां बहुत खराब हैं."

राजनीतिक गरिमा

लेकिन अयोध्या की प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञान दास योगी आदित्यनाथ के बयान को 'ओछा और अनुचित' करार देते हुए कहते हैं कि दंगा किसी एक धर्म के लोग नहीं फैलाते.

बकौल महंत ज्ञान दास, "योगी की भाषा और सोच उनकी धार्मिक और राजनीतिक गरिमा के खिलाफ है. उन्हें अपनी सोच बदलनी चाहिए वर्ना समाज का बहुत बड़ा नुकसान होगा."

कुछ ऐसा ही ख्याल सरयू कुंज मंदिर के महंत युगल किशोर शरण शास्त्री का भी है. वे उल्टा सवाल दागते हैं, "बंगाल, बिहार और केरल में भी तो मुस्लिमों की बड़ी आबादी है पर वहां ऐसे दंगे नहीं होते. क्यों? दंगा उन्हीं जगहों पर होता है, जहाँ हिन्दूवाद और ब्राह्मणवाद की जड़े गहरी हैं."

पाबंदी की मांग

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लव-ज़ेहाद वाले बयान पर वो कहते हैं कि अंतर जातीय और अंतरधार्मिक विवाह होने लगे तो समाज और देश ज्यादा मज़बूत होगा.

शास्त्री ऐसे बयानों को दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं. सपा सहित कुछ राजनीतिक दलों ने भी उपचुनावों में योगी के प्रचार करने पर पाबंदी की मांग की है. मगर वेदांती इसे गलत बताते हुए चेतावनी देते हैं कि यदि ऐसा हुआ तो संत इसके खिलाफ जनजागरण के लिए उतरेंगे.

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