मोदी का भाषण: 'देखें गुरुजी क्या करेंगे?'

  • 5 सितंबर 2014
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शुक्रवार को शिक्षक दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर तीन बजे से पौने पाँच बजे तक देश भर के स्कूली छात्रों को संबोधित करेंगे.

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने सभी स्कूलों से प्रधानमंत्री का भाषण दिखाने के लिए ज़रूरी इंतज़ाम करने को कहा है.

दिल्ली सरकार ने भी इस विषय में स्कूलों को सर्कुलर जारी किया है.

इस सर्कुलर की ख़ास बातों में स्कूलों से ज़रूरी संख्या में टेलीविज़न सैट, सेट टॉप बॉक्स कनेक्शन, प्रोजेक्टर, स्क्रीन, एंप्लीफ़ायर, जेनरेटर या इन्वर्टर सेट की व्यवस्था करना, सीधे प्रसारण' के दौरान अनुशासन बनाए रखना और सभी दिशा निर्देशों का सख़्ती से पालन नहीं होने पर लापरवाही को गंभीरता से लिए जाने की बात शामिल हैं.

ऐसे में हमने देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित स्कूलों का हाल जानने की कोशिश की.

पटना से मनीष शांडिल्य

शिक्षक दिवस पर प्रधानमंत्री के संबोधन को बच्चों तक पहुंचाने की तैयारी पटना के कंकड़बाग स्थित भारती मध्य विद्यालय में भी की गई है. लेकिन राज्य की राजधानी में स्थित होने के बावजूद इस स्कूल में बिजली नहीं है और बच्चे संबोधन रेडियो पर सुनेंगे.

बिजली के साथ-साथ स्कूल में पेयजल की व्यवस्था भी नहीं है और शौचालय काम लायक नहीं हैं.

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इस स्कूल की ख़ास बात यह है कि एक ही इमारत में चार विद्यालय एक साथ चलते हैं. स्कूल भवन भारती मध्य विद्यालय का है. लेकिन 2009 में यहां तीन दूसरे स्कूलों को भी समायोजित कर दिया गया.

दोपहर में चलने वाले तीन अन्य स्कूल मात्र तीन कमरों में चलते हैं जबकि हर स्कूल में आठवीं तब की पढ़ाई होती है. नतीजा यह कि एक कमरे में एक से अधिक वर्ग के बच्चे एक साथ पढ़ने को मजबूर हैं.

ऐसे में आठवीं की छात्रा विभा कुमारी प्रधानमंत्री को सुनने के अलावा उन तक अपनी यह मांग भी पहुंचाना चाहती हैं कि उसके लिए पर्याप्त कमरों वाले सुविधायुक्त स्कूल की व्यवस्था की जाए.

रांची से नीरज सिन्हा

"सुना तो है कि शिक्षक दिवस पर प्रधानमंत्री कोई भाषण करने वाले हैं. लेकिन उन्हें देख- सुन कैसे सकेंगे. स्कूल में बिजली पहुंची नहीं है. टीवी, कंप्यूटर तो हमारे लिए सपना जैसा है. अब देखिए गुरुजी क्या व्यवस्था करते हैं, ताकि गांव के बच्चे भी कार्यक्रम से जुड़ सकें."

झारखंड के एक गांव उलिहातू स्थित सरकारी स्कूल के छात्र पवन कुमार इतना बोलकर क्षण भर के लिए खामोश हो जाते हैं.

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झारखंड में सरकारी स्कूलों की संख्या 41 हजार तक है. इनमें 90 फीसदी स्कूल ग्रामीण इलाके में हैं.

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की नेशनल एलीमेंट्री एजुकेशन रिपोर्ट कार्ड 2012-13 के मुताबिक झारखंड में अब तक महज 11.1 फीसदी स्कूलों तक बिजली पहुंची हैं और महज 8.3 फीसदी स्कूलो में कंप्यूटर की सुविधाएं हैं.

प्राइमरी स्कूलों के बहुत बच्चों को इस कार्यक्रम की फिलहाल जानकारी नहीं है. कइयों ने सुना है, लेकिन उनकी उत्सुकता है कि क्या कुछ होने वाला है.

राज्य के मानव संसाधन विकास विभाग की सचिव अराधना पटनायक कहती हैं कि इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी जिलों के उपायुक्तों और शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं.

वो बताती हैं कि सिर्फ़ नौ सौ स्कलों में ही टीवी सेट हैं. लिहाजा 20 हजार स्कूलों में रेडियो के माध्यम से बच्चों को इस कार्यक्रम से जोड़ने की तैयारी है.

रायपुर से आलोक प्रकाश पुतुल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन छत्तीसगढ़ के आधे से अधिक स्कूली बच्चे नहीं देख पाएंगे क्योंकि राज्य के 59 फीसदी स्कूलों में टीवी की कौन कहे, बिजली ही नहीं है.

छत्तीसगढ़ के कुल 61 हज़ार स्कूलों में से केवल 41.4 प्रतिशत स्कूलों में ही बिजली है. जिन स्कूलों में बिजली नहीं है, उन्हें इस बात के निर्देश नहीं दिए गए हैं कि वे इस स्थिति में किस तरह की वैकल्पिक व्यवस्था करें.

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हालांकि राज्य के शिक्षा मंत्री केदार कश्यप का दावा है कि हरसंभव बच्चों तक प्रधानमंत्री का संदेश पहुंचाने की कोशिश की जाएगी लेकिन इसके लिए किए जाने वाले उपाय की जानकारी उन्हें भी नहीं है.

जयपुर से आभा शर्मा

जयपुर से 75 किलोमीटर दूर है पहाड़पुरा ढाणी. यहाँ का प्राथमिक विद्यालय प्रधानमंत्री का संबोधन विद्यार्थियों को दिखाने में असमर्थ है, क्योंकि यह प्रदेश के बिना बिजली वाले विद्यालयों में से एक है.

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स्कूल के इन्चार्ज श्यामलाल शर्मा का कहना है कि स्कूल में बिजली का कनेक्शन नहीं होने से ट्रांजिस्टर पर प्रधानमंत्री का संबोधन बच्चों को सुनवाएंगे.

पास के किसी अस्पताल या अन्य स्थान से अस्थायी बिजली लेकर भी बच्चों को टी वी दिखाने की कोशिश की जा रही है.

श्याम लाल आसपास के इलाके के नोडल अधिकारी भी हैं और जिला कलेक्टर के प्रधानमंत्री के संबोधन को सब स्कूलों में दिखाने सुनाने के निर्देश को सब जगह पहुंचा रहे हैं.

प्रदेश में करीब 74,664 प्राथमिक और माध्यमिक सरकारी विद्यालय हैं मगर बिजली का कनेक्शन कोई 25, 935 में ही है.

क्या है देश में स्कूलों की स्थिति

भारत में केवल 49.9 प्रतिशत स्कूलों में ही बिजली की सुविधा है.

राज्य बिजली की सुविधा वाले स्कूलों का प्रतिशत

  • बिहार 4.8

  • झारखंड 11.1
  • मध्यप्रदेश 23.1

  • झारखंड 11.1
  • ओडिशा 23.9

  • उत्तरप्रदेश 38.5

हालांकि चंडीगढ़, पुड्डूचेरी और लक्षद्वीप जैसे राज्य भी हैं, जहां सौ फीसदी स्कूलों में बिजली की सुविधा है. देश की राजधानी दिल्ली में यह आंकड़ा 99.7 प्रतिशत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इलाके गुजरात में यह आंकड़ा 98.7 प्रतिशत है.

(स्रोतः राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन विश्वविद्यालय, मानव संसाधन मंत्रालय, 2013)

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