'ऐलिस इन वंडरलैंड' में दास्तानगोई

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इस बयान को कहने में बड़ा मज़ा आया और बच्चों को यह ख़ूब पसंद आया.

ऐसा कहा 'दास्तान-ए-एलिस' बयान करने वाले दास्तानगो अंकित चड्ढा ने.

बीते हफ़्ते देश की राजधानी दिल्ली में बच्चों के लिए पहली बार एक दास्तान का बयान किया गया.

ये दास्तान आधारित थी अंग्रेज़ी की मशहूर कहानी 'एलिस इन वंडरलैंड' पर.

इस बयान को महमूद फ़ारूक़ी ने लिखा जो पिछले कई सालों से दास्तानगोई कर रहे हैं.

बड़ों ने भी सराहा

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अंकित बताते हैं, "हमने यह बयान बच्चों के लिए तैयार किया था, पर बच्चों के साथ बड़ों ने भी इसे ख़ूब पसंद किया. बच्चों के साथ अच्छी बात यह हुई कि बच्चों ने हमें दास्तान ख़त्म होने के फ़ौरन बाद बता दिया कि उन्हें क्या अच्छा लगा और क्या ख़राब."

“बड़ों के लिए जब हम जब कोई दास्तान करते हैं तो उसमें ख़ालिस उर्दू का इस्तेमाल किया जाता है पर क्योंकि हमने यह बच्चों के लिए किया था इसलिए हमने भाषा काफ़ी सरल रखी और हमने कहीं-कहीं इंग्लिश के शब्दों का भी इस्तेमाल किया.”

नई दास्तानें

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अंकित कहते हैं, "जिस तरह की प्रतिक्रिया हमें बच्चों से मिली हम उससे इतने ख़ुश हुए कि हमने अब बच्चों के लिए और दास्तान बयान करने का निर्णय लिया है."

"हमने अभी तक तीन कहानियों का चुनाव किया है जिसमें से एक है ऐलिस इन वंडरलैंड जो तैयार हो चुकी है, दूसरी है ओनतवों दे संत एग्ज़ज़ूप्री की किताब द लिटिल प्रिंस और हमारी तीसरी पेशकश होगी सत्यजीत रे के अंकल द्वारा लिखी गई कहानी गोपी गाय बागा बाएं."

अंकित का कहना है कि वो इस साल के अंत तक इन सभी कहानियों का मंचन करेंगे.

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