शहनाई बजती थी, तो इमली दिखाते थे: मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षक दिवस के मौक़े पर बच्चों से सीधी बातचीत भी की और उनके सवाल के जवाब में अपने बचपन की शैतानियों के किस्से सुनाए.

जब एक बच्चे ने उनसे उनके बचपन की शरारत की बात पूछी तो उन्होंने कहा कि जब शहनाई वाले शादी या किसी उत्सव में बाजा बजा रहे होते थे वो अपने दोस्तों के साथ उन सबको दूर से इमली दिखाते थे.

उन्होंने हंसते हुए बच्चों से पूछा कि इमली दिखाने से क्या होता है फिर ख़ुद जवाब देते हुए कहा कि उससे मूंह में पानी आता है.

लेह की एक बच्ची के सवाल के जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वो और उनके दोस्त दो लोगों के कपड़े स्टैप्ल कर देते थे.

लेकिन मोदी ने बच्चों से पहले ही कहा कि वो वादा करें कि वो इन सबकी नक़ल नहीं करेंगे.

'गूगल गुरू से ज्ञान नहीं'

मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि गूगल से जवाब को मिल सकते हैं लेकिन ज्ञान नहीं मिलता.

उन्होंने कहा कि ज़रूरत है कि इस बात को उजागर किया जाना चाहिए कि शिक्षक और शिक्षा का महत्व क्या है.

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उन्होंने कहा कि ये जानने की जरूरत है कि क्यों बहुत बेहतरीन छात्र भी शिक्षक नहीं बनना चाहते हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "जब तक शिक्षक के महत्व को हम स्वीकार नहीं करेंगे तब तक नई पीढ़ी के परिवर्तन में कोई सफलता नहीं मिलेगी. इस पर चिंतन होने की ज़रूरत है."

उन्होंने कहा, "बहुत समर्थवान विद्यार्थी टीचर बनना क्यों पसंद नहीं करते. माना जाता है पूरे विश्व में अच्छे टीचर मिल नहीं रहे हैं. क्या भारत जैसा युवा देश विश्व को ऐसा सपना नहीं दे सकता और पूरे दुनिया को टीचर एक्सपोर्ट कर सकता है?"

खेल कूद का महत्व

मोदी ने कहा बातचीत के दौरान खेल कूद के महत्व को भी उजागर किया और कहा कि बच्चों को खेल कूद में समय बिताने की ज़रूरत है.

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उन्होंने बच्चों से कहा कि उन्हें कम से कम दिन में कई बार अपने जिस्म से पसीना बहाने की ज़रूरत है.

उन्होंने तो यहां तक कहा कि जीवन में खेल कूद नहीं तो जीवन नहीं खिलता है.

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