कश्मीर: 'कभी नहीं देखी ऐसी बाढ़'

  • 6 सितंबर 2014
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भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में कई दिनों से हो रही भारी बारिश तो थम गई है लेकिन लोगों की ज़िंदग़ी अब भी बेहाल है.

बाढ़ प्रभावित लाखों लोग मदद का इंतज़ार कर रहे हैं. कई इलाक़ों में सूचना और संपर्क तंत्र टूट जाने के कारण प्रभावितों के बारे में पूरी जानकारी भी नहीं मिल पा रही है.

भारी बारिश और बाढ़ के कारण अब तक कम से कम 90 लोग मारे गए हैं.

विपक्ष की नेता महबूबा मुफ़्ती ने राज्य की स्थिति को राष्ट्रीय संकट घोषित करने की माँग की है.

लोगों में ग़ुस्सा

शुक्रवार को कुछ मंत्रियों ने प्रभावित लोगों से बात करने की कोशिश की तो लोगों ने पथराव कर दिया जिस पर उनके सुरक्षा कर्मियों को हवा में गोलियाँ भी चलानी पड़ी.

एक प्रभावित व्यक्ति ने बताया, "इतना पानी कभी नहीं आया. तब हमने बच्चों को निकाला. रात हमने कार में गुज़ारी."

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एक अन्य व्यक्ति ने कहा, "बहुत दिक्कत हो गई. मैंने बहुत मुश्किल से रात गुज़ारी."

उपमुख्यमंत्री ताराचंद ने लोगों के ग़ुस्से के देखते हुए एक प्रेस कांफ्रेंस कर राहत कार्यों में तेज़ी लाने का वादा किया.

कश्मीर घाटी और जम्मू के रजौरी, डोडा और पुँछ इलाक़ों में पिछले हफ़्ते से हो रही लगातार बारिश के कारण नदियों में बाढ़ आ गई है.

रजौरी में बाढ़ के पानी में लापता हुई बारात ले जा रही बस में सवार सभी पचास लोगों के मारे जाने की पुष्टि की गई है.

पहली बार

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दिल्ली से पहुँची राष्ट्रीय आपदा राहत बल की एक कंपनी ने सेना और पुलिस के जवानों की मदद से राहत कार्य शुरू कर दिया है.

सेना ने मिशन सहायता शुरू करके बाढ़ में फँसे क़रीब डेढ़ हज़ार लोगों को बचाने का दावा किया है.

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विशेषज्ञों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में पिछले 57 वर्षों में ऐसी बाढ़ पहली बार आई है.

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