'जनरल वीके सिंह ने नियमों का उल्लंघन किया'

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Image caption क्या मोदी जनरल वीके सिंह पर कार्रवाई करेंगे?

सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (आर्म्ड फ़ोर्सेस ट्राइब्यूनल या एएफ़टी) ने पूर्व थलसेनाध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह को लगभग दोषी ठहराते हुए लेफ़्टिनेंट जनरल पीके रथ का कोर्ट मार्शल रद्द कर दिया है.

न्यायमूर्ति सुनील हाली की अध्यक्षता वाली एएफ़टी की पीठ ने कहा, ''याचिकाकर्ता को सभी आरोपों से बरी किया जाता है. वह 12 फ़ीसदी ब्याज के साथ सभी लाभ की बहाली के हक़दार हैं.''

एएफ़टी ने रथ की याचिका मंज़ूर कर ली, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि जनरल वीके सिंह ने मामले को अनुचित महत्व दिया था, क्योंकि उन्हें तत्कालीन सैन्य सचिव लेफ़्टिनेंट जनरल अवधेश प्रकाश के ख़िलाफ़ 'गंभीर खुन्नस' थी.

न्यायाधिकरण ने रथ की 'प्रताड़ना और उनके सम्मान को हुए नुक़सान' के लिए थलसेना पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया.

साल 2011 में पश्चिम बंगाल में एक ज़मीन सौदे में कथित भूमिका की ख़ातिर लेफ़्टिनेंट जनरल पीके रथ का कोर्ट मार्शल किया गया था.

'सुकना घोटाला'

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Image caption जनरल वीके सिंह ने जनरल अवधेश प्रकाश को निजी कारणों से 'प्रताड़ित' किया.

उन पर आरोप था कि उन्होंने पश्चिम बंगाल के सुकना में मिलिट्री छावनी से सटे 70 एकड़ ज़मीन पर एक शैक्षणिक संस्थान बनाने के लिए एक निजी बिल्डर को एनओसी (नो ऑबजेक्शन सर्टिफ़िकेट) दिया था.

जनरल वीके सिंह तब पूर्वी थल सेना कमांडर थे और उन्होंने इसकी जांच शुरू करवाई थी.

इस फ़ैसले को चुनौती देते हुए जनरल रथ ने एएफ़टी का दरवाज़ा खटखटाया था.

ट्राइब्यूनल ने कहा कि जनरल वीके सिंह ने नियम का उल्लंघन करते हुए मिलिट्री कोर्ट को अपने हिसाब से प्रभावित किया.

एएफ़टी ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जनरल वीके सिंह ने बदले की भावना से सीनियर अफ़सरों की प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाई है.

जनरल रथ ने इस फ़ैसले पर एएफ़टी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि वो बहुत ख़ुश हैं क्योंकि सच्चाई सामने आ गई है.

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