धान बेचना है? पहले मोबाइल फ़ोन लाइए!

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आरंग के देवप्रकाश चंद्राकर इस वर्ष छत्तीसगढ़ सरकार को समर्थन मूल्य पर धान नहीं बेच पाएंगे क्योंकि उनके पास मोबाइल फ़ोन नहीं है.

चौंकिए मत, छत्तीसगढ़ में अगर आपको सरकार को धान बेचना है तो आपके पास मोबाइल फ़ोन होना ज़रुरी है.

धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में इस साल सरकार ने समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए किसानों को इस माह के अंत तक पंजीयन कराने के निर्देश दिए हैं. लेकिन जिन किसानों के पास मोबाइल फ़ोन नहीं हैं, उनका पंजीयन नहीं किया जा रहा है.

यहां तक कि अगर किसी परिवार में कई सदस्यों के नाम से ज़मीन है तो सभी के नाम से अलग-अलग पंजीयन करवाना होगा और ज़ाहिर है सबके पास इसके लिए अलग-अलग मोबाइल फ़ोन भी होने चाहिए.

फ़र्ज़ी किसान

राज्य के खाद्य मंत्री पुन्नूलाल मोहले कहते हैं, “हमने पिछले साल 80 लाख मिट्रिक टन धान खरीदा था. लेकिन इसमें कई फ़र्ज़ी किसानों ने धान बेचा था. हमने इसी की रोकथाम के लिए मोबाइल फ़ोन को पंजीयन में अनिवार्य किया है.”

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मोहले का दावा है कि इससे किसान को धान बेचने में सुविधा होगी. मोहले का कहना है कि आज की तारीख में गांव के अधिकांश किसानों के पास मोबाइल फ़ोन है.

लेकिन सरकारी आंकड़े कुछ और ही हैं. भारत सरकार के आंकड़ों को देखें तो प्रति 100 लोगों में से मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करने वालों की संख्या छत्तीसगढ़ में मार्च 2012 में 53.81 थी जो दिसंबर 2012 में घट कर 52.23 रह गई.

आंकड़ों में गड़बड़ी

जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि साल 2011 में छत्तीसगढ़ की 76.76 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है और इन गांवों में प्रति 100 लोगों में केवल 29.51 लोग ही मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं.

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दिलचस्प ये है कि साल 2012 तक के अंतिम उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य के कुल 19,720 गांवों में से 5,460 गांवों में मोबाइल फ़ोन की सुविधा ही उपलब्ध नहीं है.

किसान नेता आनंद मिश्रा का कहना है कि सरकार किसी भी तरह से किसानों से धान खरीदने से बचना चाहती है क्योंकि नरेंद्र मोदी की सरकार ने इस तरह समर्थन मूल्य पर फ़सलों की ख़रीदी नहीं करने के निर्देश दिए हैं.

आनंद मिश्रा कहते हैं, “राज्य में भाजपा की सरकार 2400 रुपए प्रति क्विंटल धान का समर्थन मूल्य करने का आश्वासन दे कर सत्ता में आई है. लेकिन सरकार 1100 रुपए में भी ख़रीदी से बचने के लिए तरह-तरह की जुगत लगा रही है.”

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