कश्मीर बाढ़: मदद के लिए सोशल मीडिया का आसरा

  • 10 सितंबर 2014
इमेज कॉपीरइट Reuters

भारत प्रशासित कश्मीर के लोग हैशटैग कश्मीर फ़्लड्स (#KashmirFloods) का इस्तेमाल कर मदद मांग रहे हैं, अपने लापता हुए दोस्तों के बारे में जानकारी दे रहे हैं और राहत और बचाव कार्य के बारे में अपडेट कर रहे हैं.

हालांकि राजनीतिक और सांप्रदायिक छींटाकशी भी इसके साथ ख़ूब हो रही है. ट्विटर का इस्तेमाल करने वाले कुछ लोग अलगाववादियों पर तंज़ कस रहे हैं.

भारत प्रशासित कश्मीर में समय-समय पर अलगाववादी समूह आज़ादी की मांग करते रहे हैं.

एक यूज़र फाल्गुन कहते हैं, "अब कहां हैं भारत विरोधी, पत्थर फेंकने वाले, आज़ादी की मांग करने वाले और सुरक्षा बलों की आलोचना करने वाले?"

एक दूसरे यूज़र अभिषेक ने लिखा है, "कश्मीर में बाढ़ के क़हर के समय में सभी अलगाववादी कहां गए और सेना विरोधी ब्रिगेड कहां सो रही है?"

कट्टरता से हटकर सोचें

हालांकि कई लोग ऐसी प्रतिक्रियाओं को असंवेदनशील मान रहे हैं.

लेखिका राणा अय्यूब लिखती हैं, "उत्तराखंड और कश्मीर की बाढ़ को लेकर धार्मिक आधार पर अंतर किया जा रहा है. यह अमानवीय है. इस समय यह कट्टरता से परे की बात है."

इमेज कॉपीरइट AP

पत्रकार आज़ाद ईसा ने लिखा है, "इतनी घृणा, इतनी ज्यादा अंधराष्ट्रीयता दुखद है. यह कोई बॉक्सिंग मैच नहीं है, मानवीय आपदा है."

जबकि जॉय लिखते हैं, "हैशटैग कश्मीर फ्लड्स का इस्तेमाल तभी करें जब आपको मदद की जरूरत है ताकि आप तक मदद पहुंच सके. इसे राजनीति से दूर रखिए."

लेखक सौरव वैश ने ट्वीट किया है, "आपदा के समय में असंवेदनशील प्रतिक्रियाओं को देखना दुखद है."

सशस्त्र सेना

इमेज कॉपीरइट AP

हालांकि सोशल साइट का इस्तेमाल करने वाले कई लोग राहत कार्यों में सेना के काम की प्रशंसा भी कर रहे हैं.

हरदीप सिंह ने लिखा है, "कश्मीर में बाढ़ में फंसे लोगों के लिए हम प्रार्थना कर रहे हैं. 20 हज़ार लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए सेना की जितनी तारीफ़ की जाए कम है."

बाढ़ प्रभावितों की खोज के लिए गूगल ऐप

इस बीच बाढ़ प्रभावितों को खोजने में मदद के लिए एक बार फिर गूगल ऐप का सहारा लिया जाएगा.

अधिकारियों को उम्मीद है कि 'पर्सन फ़ाइंडर' नामक इस एप्लीकेशन के माध्यम से लापता लोगों की खोज में मदद मिल सकती है. ये इसलिए भी अहम है क्योंकि वहां बचाव टीमें ख़राब संचार नेटवर्क से जूझ रही हैं.

इमेज कॉपीरइट Reuters

ख़ासतौर पर बाढ़ पीड़ितों की खोज के लिए तैयार इस एप्लीकेशन के ज़रिए लोग अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों की जानकारी के लिए उनकी स्थिति एप्लीकेशन में डाल सकते हैं. उसके बाच बचावकर्मी उन लोगों के बारे में जानकारी जुटाएंगे.

'पर्सन फ़ाइंडर' नामक इस एप्लीकेशन से जुड़े गूगल इंडिया के प्रतिनिधि रजनील कामथ ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि उत्तराखंड त्रासदी के समय भी गूगल ने इस एप्लीकेशन को लांच किया था, जिससे लोगों को काफी मदद मिली थी.

(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की खबरें ट्विटर और फ़ेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार