अमित शाह के ख़िलाफ़ चार्जशीट कोर्ट ने लौटाई

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भड़काऊ भाषण के मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश पुलिस के आरोपपत्र को कोर्ट ने लौटा दिया है.

मुज़फ़्फ़रनगर में भाजपा के वकील चंद्रवीर सिंह ने बताया कि अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने तकनीकी ख़ामी के बाद शाह के ख़िलाफ़ आरोपपत्र का संज्ञान लेने से इन्कार कर दिया.

उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट का कहना था कि पुलिस ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 (2) का उल्लंघन किया गया है.

इस धारा के तहत आरोपपत्र दायर करने से पहले अभियुक्त का बयान दर्ज करना ज़रूरी है. साथ ही अभियुक्त को गिरफ़्तार किया जाना चाहिए.

मजिस्ट्रेट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 188 लगाए जाने को भी ख़ारिज कर दिया. इस धारा के तहत धारा 144 के उल्लंघन की सज़ा दी जाती है.

मंजूरी

कोर्ट का कहना था कि इसके लिए मजिस्ट्रेट की मंज़ूरी लेनी ज़रूरी होती है जो पुलिस ने नहीं ली थी.

पुलिस ने बुधवार को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में चार्जशीट दाख़िल की थी.

पुलिस ने जाँच के दौरान शाह पर कई गंभीर धाराओं के अंतर्गत मुक़दमा दर्ज किया था.

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लोकसभा चुनाव के दौरान शाह ने मुज़फ़्फ़रनगर-शामली में कई जगह जनसभाएं की थी और उन पर समाज में उत्तेजना फैलाने वाले भाषण देने के आरोप लगे थे.

मुकदमे

मुज़फ़्फ़रनगर के अलावा शामली और बिजनौर में भी उनके ख़िलाफ़ मुक़दमे दर्ज किए गए थे.

मुज़फ़्फ़रनगर के थाना नई मंडी क्षेत्र के एक हॉल में शाह ने चार अप्रैल 2014 को एक जनसभा को संबोधित किया था.

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आरोप है कि शाह ने इस रैली में आपत्तिजनक भाषण दिया था जिसकी वीडियो क्लिप के आधार पर 12 अप्रैल को थाना नई मंडी पुलिस ने अमित शाह के ख़िलाफ़ लोक प्रतिनिधि अधिनियम के तहत मामल दर्ज किया था.

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