दुधमुंहे को नोटिस भेज फँसी पुलिस

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एक साल के दुधमुँहे बच्चे के ख़िलाफ़ 'शांति-भंग' करने का अंदेशा जताने वाली रिपोर्ट भेजने के आरोप में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद ज़िले में तीन पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है.

यह कारवाई ज़िले के ठाकुरद्वारा पुलिस स्टेशन के प्रभारी और उनके दो मातहतों के ख़िलाफ़ शुरू की गई है.

13 सितंबर को मुरादाबाद में होने वाले विधानसभा उपचुनाव के मद्देनज़र, स्थानीय थाने ने इलाक़े के उन लोगों की सूची प्रशासन को भेजी थी जिनके ऊपर मतदान के दिन शांति भंग करने का अंदेशा है या जो मतदान केंद्रों पर क़ब्ज़ा कर चुनावी प्रक्रिया को बाधित कर सकते हैं.

इसी क्रम में पुलिस ने उस्मानपुर के 28 वर्षीय यासीन और उनके साल भर से कम उम्र के बेटे नाज़िम के ख़िलाफ़ भी प्रशासन को रिपोर्ट भेजी.

पढ़िए पूरी रिपोर्ट

रिपोर्ट के आधार पर अनुमंडल अधिकारी ने दोनों को अपराध दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी की धारा 107 के तहत नोटिस भी भेज दिया.

जब यासीन अपने पुत्र नाज़िम को साथ लेकर अनुमंडल अधिकारी की अदालत में पचास हज़ार का निजी मुचलका भरने पहुंचे तब जाकर यह मामला सामने आया.

मुचलका

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यह प्रक्रिया रही है कि जिनके ख़िलाफ़ इस धारा के तहत नोटिस भेजा जाता है उनको निजी मुचलका भरना पड़ता है. उन्हें जेल हो सकती है. हालांकि यासीन ने मुचलका भरा, मगर जब उनके एक वर्षीय बेटे की बारी आई तो अनुमंडल अधिकारी चौंक गए.

अनुमंडल अधिकारी ने इस मामले की सूचना फ़ौरन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी.

मुरादाबाद क्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक गुलाब सिंह ने बीबीसी को बताया कि ठाकुरद्वारा पुलिस स्टेशन के अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है.

उन्होंने कहा, "यह साफ़ है कि अधिकारियों ने बिना गए रिपोर्ट तैयार कर ली और उसे प्रशासन को भेज दिया. मामले की जांच की जा रही है और दोषी पुलिसकर्मियों का निलंबन भी तय है. हो सकता है आज शाम तक उन्हें निलंबित भी कर दिया जाए."

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