जिनकी धमनियों में दौड़ता स्कॉच का ख़ुमार

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स्कॉटलैंड की आज़ादी के लिए हुए सर्वेक्षण को भारत में कई लोग इसलिए भी दिलचस्पी से देख रहे थे कि क्या इसका स्कॉच पर कुछ असर होगा.

ये सवाल उठने लाज़िमी भी है, क्योंकि भारत दुनिया में स्कॉच का चौथा सबसे बड़ा बाज़ार है. हालांकि स्कॉटलैंड की जनता ने आज़ादी को ख़ारिज कर दिया है.

स्पिरिट्ज़ पत्रिका के संपादक बिशन कुमार का विश्लेषण

ये बात किसी से छिपी नहीं है कि भारतीयों को व्हिस्की ख़ूब पसंद आती है, इस लिहाज़ से भारत व्हिस्की निर्माताओं के लिए सबसे बड़ा बाज़ार है.

एक अनुमान के मुताबिक़ 56 फ़ीसदी भारतीय व्हिस्की पीते हैं जबकि 15 फ़ीसदी रम, यानी 61 फ़ीसदी लोग ब्राउन स्प्रिटिस पीते है. वहीं दुनिया भर में व्हिस्की और रम महज 20 फ़ीसदी लोग पीते हैं.

खपत के हिसाब से स्कॉच व्हिस्की का भारत चौथा सबसे बड़ा बाज़ार है. मूल्य के हिसाब से स्कॉच के 20 सबसे बड़े बाज़ारों में भारत 14वें स्थान पर है.

मूल्य के हिसाब से भी देखें भारत में स्कॉच के दामों में तेज़ बढ़ोत्तरी हुई है. 2013 में स्कॉच की क़ीमत 12 फ़ीसदी बढ़कर 69 पाउंड तक पहुंच गई.

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भारत में स्कॉच के कारोबार के बारे में स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन (एसडब्ल्यूए) के सीईओ डेविड फ्रॉस्ट ने हाल ही में स्पिरिट्ज़ पत्रिका से बातचीत में कहा, "भारत स्कॉच व्हिस्की के सबसे बड़े संभावित बाज़ारों में है. यह दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार है और सभी प्रमुख कंपनियां यहां कारोबार की संभावनाओं को लेकर काफी उत्साहित है. वे भारत के लिए दीर्घकालीन रणनीति बना रहे हैं."

व्हिस्की निर्माताओं की पसंद क्यों है भारत

  • भारत में हर साल 2.2 करोड़ लोग क़ानूनी तौर शराब पीने लायक होते हैं, इसमें 90 लाख लोग शराब पीने भी लगते हैं.
  • खपत के हिसाब से भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा बाज़ार है.
  • महिलाओं में शराब पीने का चलन बढ़ रहा है. प्रमुख सात शहरों में 2010 में दस फ़ीसदी महिलाएं शराब पीती थीं, 2012 में यह आंकड़ा बढ़कर 14 फ़ीसदी हो गया.
  • भारत में उच्च वर्ग में शराब पीने का चलन बढ़ रहा है. बीते तीन सालों में बेहद अमीर घरों में शराब पीने का चलन 45 फ़ीसदी बढ़ा है, तो अमीर परिवारों में 100 फ़ीसदी. जबकि शराब पीने वाले परिवार में 16 फ़ीसदी बढ़ोत्तरी हुई है.
  • मोटे अनुमान के तौर पर 2017 में भारत में प्रति व्यक्ति शराब की खपत ग्रेट ब्रिटेन जितनी, यानी 5 लीटर प्रति व्यक्ति हो जाएगी.
  • आने वाले चार सालों में इसके कारोबार में सालाना 2,500 से 3,000 करोड़ रुपए का इज़ाफ़ा होने का अनुमान है.

मुक्त व्यापार समझौता

भारतीय के स्कॉच प्रेमियों के लिए इसकी क़ीमत को लेकर थोड़ी सावधानी की ज़रूरत है.

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हालांकि अगर भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता होता है, तो इस असर को दूर करना संभव होगा. भारत में कारोबार बढ़ाने के लिए स्कॉच निर्माता मुक्त व्यापार समझौते के सकारात्मक होने की उम्मीद कर रहे हैं. हालांकि ये बातचीत पिछले आठ-नौ सालों से चल रही है.

स्कॉच निर्माताओं को ये भी उम्मीद है कि नई दिल्ली की नई सरकार स्कॉच व्हिस्की के आयात पर लगाई जा रही 150 फ़ीसदी निर्यात शुल्क में कटौती करेगी.

एसडब्ल्यूए के सीईओ डेविड फ्रॉस्ट ने स्प्रिट्ज से बातचीत में कहा है, "हम कस्टम ड्यूटी घटाने की मांग कर रहे हैं, इंटरनेशनल स्प्रिटिस एंड वाइन एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया भी इसकी मांग कर रहा है. अगर भारत सरकार इसे कम कर देती या खत्म कर देती है, तो हमारे लिए अच्छा होगा. हम साथ मिलकर निर्यात को बढ़ाकर बाज़ार को बड़ा कर सकते हैं."

अगर ऐसा हुआ तो स्कॉच निर्माता और स्कॉच प्रेमियों, दोनों का फ़ायदा होगा.

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