ग़ायब हो रहे हैं दिल्ली के क़ब्रिस्तान

  • 21 सितंबर 2014
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दिल्ली की ये हक़ीक़त भी दिलचस्प है. बीते 40 साल में यहां मुसलमानों की आबादी कई गुना बढ़ी है तो क़ब्रिस्तान की संख्या लगातार घटती जा रही है.

एक वक़्त था जब इस शहर में क़रीब 500 क़ब्रिस्तान थे, लेकिन आज इनकी तादाद एक चौथाई भी नहीं रह गई है.

ये बात और है कि दस्तावेज़ों में कहानी कुछ अलग है. दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के मुताबिक़ दिल्ली में आज भी 488 क़ब्रिस्तान हैं. लेकिन ज़मीन पर ये नज़र नहीं आते हैं.

अफ़रोज़ आलम साहिल की रिपोर्ट

दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के सेक्शन अफ़सर ख़ुर्शीद आलम फ़ारूक़ी बताते हैं कि दिल्ली में अभी 70-80 क़ब्रिस्तान ही ज़िन्दा हैं.

यानी सिर्फ़ इन्हीं क़ब्रिस्तानों में मृत व्यक्ति को दफ़नाया जा सकता है.

1971 की जनगणना के मुताबिक़ दिल्ली में सिर्फ साढ़े छह फ़ीसदी ही मुसलमान थे तो वहीं अब एक करोड़ 78 लाख आबादी वाली दिल्ली में मुसलमानों का प्रतिशत 11.7 है.

क़ब्रिस्तान ग़ायब?

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ख़ुर्शीद आलम फ़ारूक़ी बताते हैं कि ज़्यादातर क़ब्रिस्तान ग़ायब हैं. अधिकतर क़ब्रिस्तानों पर अनाधिकृत क़ब्ज़े हैं तो कुछ क़ब्रिस्तानों की ज़मीन का इस्तेमाल सरकार दूसरे कामों में कर रही है.

वेलफ़ेयर पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एसक्यूआर इलियास को सूचना के अधिकार (आरटीआई) से मिले दस्तावेज़ बताते हैं कि दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के 1970 की सरकारी अधिसूचना में 488 मुस्लिम क़ब्रिस्तान दर्ज हैं.

आरटीआई से मिले दस्तावेज़ों से ये भी पता चलता है कि दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड इन क़ब्रिस्तानों के रख-रखाव को लेकर गंभीर नहीं है.

2006 से लेकर 2013 तक दिल्ली के क़ब्रिस्तानों के रख-रखाव पर सिर्फ़ 13 लाख 97 हज़ार 899 रूपए ख़र्च हुए हैं.

आरटीआई का जवाब

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आरटीआई से हासिल दस्तावेज़ों के मुताबिक़ 158 वक़्फ की सम्पत्तियों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का कब्ज़ा है, जिनमें 11 क़ब्रिस्तान भी शामिल हैं.

हालांकि पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक डॉक्टर बीआर मणि इस आरोप से इनकार करते हैं.

उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, "क्या सरकार कभी गैर-क़ानूनी क़ब्ज़ा करती है?"

उनका कहना है, "पुरातत्व विभाग उन्हीं धरोहरों को अपनी देख-रेख में लेता है, जिनका ऐतिहासिक महत्व होता है. हो सकता है कि वक़्फ बोर्ड की कोई ऐसी धरोहर हो, जिसके साथ क़ब्रिस्तान भी जुड़ा हुआ हो. वरना हम क्यों क़ब्रिस्तान को अपनी देख-रेख में लेंगे?"

दरगाह या मस्जिद

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इतना ही नहीं, जब हमने वक़्फ़ बोर्ड की सम्पत्तियों की सूची को खंगालना शुरू किया तो पता चला कि राष्ट्रीय राजधानी में कुल 562 छोटे-बड़े क़ब्रिस्तान हैं.

इनमें से कुछ दरगाह या मस्‍जिद से जुड़े हुए हैं और कुछ अलग से हैं. लेकिन अब दिल्ली वक़्फ बोर्ड सिर्फ 488 क़ब्रिस्तान ही बता रहा है.

सवाल यह भी उठता है कि क़ागज़ों में क़ब्रिस्तानों की संख्या 562 से घटकर 488 कैसे रह गई?

पक्के कब्र

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Image caption कब्रिस्तान के प्रबंधन से जुड़े लोगों ने पक्की कब्र बनाने की इजाजत नहीं देने का फैसला किया है.

इस सवाल के जवाब में दिल्ली वक़्फ बोर्ड के सेक्शन ऑफिसर बताते हैं कि वो पहले के दस्तावेज़ होंगे. पहले तकिया या खानख़्वाह को भी लोग क़ब्रिस्तान में ही गिनते थे.

घटते क़ब्रिस्तान अब दिल्ली के मुसलमानों के लिए चिंता का विषय बन चुके हैं.

आलम यह है कि क़ब्रिस्तानों के प्रबंधन से जुड़े लोगों ने एक बैठक आयोजित कर यह फैसला लिया है कि अब से किसी भी क़ब्रिस्तान में पक्की कब्र बनाने की इजाज़त नहीं दी जाएगी.

दिल्ली के मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज के कैंपस में स्थित प्रसिद्ध निजी क़ब्रिस्तान 'मेहदियान' में अब ज़मीन कम पड़ने लगी है.

पूर्वजों की कब्र

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मेहदियान के केयरटेकर वली मोहम्मद बताते हैं कि इस क़ब्रिस्तान में 400 से अधिक धार्मिक विद्वान दफन हैं. इसलिए हर कोई चाहता है कि उन्हें यहां दफनाया जाए.

लेकिन ज़मीन की किल्लत को देखते हुए जिनके पूर्वज यहां दफन हैं, उन्हें पूर्वजों की कब्रों में ही दफ़नाए जाने की इजाज़त दी जाती है.

वो बताते हैं कि उर्दू के मशहूर शायर हकीम मोमिन खां मोमिन भी इसी क़ब्रिस्तान में दफ़न हैं.

आरटीआई से मिले दस्तावेज़ों के मुताबिक दिल्ली का इंद्रप्रस्थ मिलेनियम पार्क भी क़ब्रिस्तान की ज़मीन पर ही बना है.

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