बादल: चौटाला से दोस्ती, छोड़ा भाजपा को

  • 23 सितंबर 2014
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पंजाब में लगभग दो दशकों से पंजाब में लगातार मिलकर चुनाव लड़ते आए अकाली दल और बीजेपी, हरियाणा विधान सभा चुनावों में आमने-सामने हैं.

इतना ही नहीं हरियाणा विधान सभा चुनाव में पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल इंडियन नेशनल लोक दल के एक ख़ास प्रचारक भी होंगे.

अकाली दो सीटों पर बीजेपी उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ चुनाव भी लड़ रहे हैं.

हरियाणा में भाजपा का हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजका) के साथ गठबंधन टूट गया. शिरोमणि अकाली और दल इंडियन नैशनल लोक दल (इनलोद) के साथ मिल कर चुनाव लड़ने का फैसला किया है.

अकाली दल - इनेलो की सियासत पर रिपोर्ट:

चौटाला का साथ

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शिरोमणि अकाली दल खुद दो क्षेत्रों - अंबाला और कालिआंवाली से चुनाव लड़ रहा है लेकिन सिख आबादी वाले तकरीबन बीस क्षेत्रों पर इसका असर हो सकता है.

पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन ने पिछली चार बार में से तीन बार सरकार बनाई है. दूसरी तरफ मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के देवी लाल परिवार से करीबी रिश्ते रहे हैं.

ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला धोखाधड़ी के मामले में दस साल की सज़ा काट रहे हैं.

इस हालत में इंडियन नेशनल लोकदल की बागडोर ओम प्रकाश चौटाला के दूसरे बेटे अभय चौटाला और पोते दुष्यंत चौटाला के हाथ में है.

प्रकाश सिंह बादल को लगता है कि चौटाला परिवार का साथ निभाने का यह अहम मौका है और वह अपनी सहयोगी भाजपा के साथ जोखिम मोल लेने को भी तैयार दिखती है.

मुखर भाजपा

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पिछले दिनों प्रकाश सिंह बादल ने लोकसभा चुनाव में भाजपा के विरोध के बावजूद हिसार में दुष्यंत चौटाला का प्रचार किया था. तब से लेकर अब तक हालत बदल चुके हैं.

पंजाब में शिरोमणि अकाली दल की शांत रहने वाली सहयोगी पार्टी - भाजपा - अब मुखर हो चुकी है और केंद्र में उसकी बहुमत वाली सरकार है.

लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा शिरोमणि अकाली दल की राजनीतिक गतिविधियों पर कोई सवाल नहीं उठाती थी .

नेताओं का दख़ल

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केंद्र में सरकार बनने और अरुण जेटली के अमृतसर से हार के बाद भाजपा सवाल भी उठाने लगी है और राज्य सरकार की आलोचना भी करती है.

दोनों पार्टियों के बीच तालमेल ठीक करने के लिए भाजपा के केंद्रीय नेताओं ने कई बार दखल दिया है.

मौजूदा विधानसभा चुनाव को इस परिस्थिति से अलग कर के नहीं देखा जा सकता है.

शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता महेशिंदर ग्रेवाल का कहना है, "दोनों पार्टियों के रिश्ते बिलकुल ठीक हैं और दोनों का गठबंधन राज्य तथा केंद्रीय मुद्दों पर है. हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल के साथ राजनैतिक गठबंधन है."

रिश्तों में खटास

Image caption विश्लेषकों की राय है कि ये गठबंधन बना रहेगा.

दूसरी तरफ भाजपा के नेता नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर मानते हैं कि रिश्तों में खटास तो आई है लेकिन गठबंधन हर हाल में कायम रहेगा.

अमृतसर में गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर परमिंदर सिंह इसको अलग ढंग से समझते हैं, "अब राजनीति में पार्टियों में कोई अंतर नहीं है. इन परिस्थितियों में भी ये गठबंधन कायम रहेगा और पढ़ने को दिलचस्प ख़बरें भी मिलती रहेंगी."

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