दिल्ली चिड़ियाघर: 'आदमखोर नहीं है बाघ'

  • सलमान रावी
  • बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

दिल्ली के चिड़ियाघर में उस सफ़ेद बाघ को फ़िलहाल नज़रबंद कर दिया गया है जिसने मंगलवार को अपने अहाते में कूदे एक युवक को मार डाला था.

हालांकि चिड़ियाघर के अधिकारियों का कहना है कि इस बाघ के आदमखोर बनने के संकेत नहीं हैं और उसे तीन-चार दिन तक निगरानी में ही रखा जाएगा.

अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल पर मौजूद गार्ड ने युवक को रोकने की कोशिश की लेकिन वो बाघ के बाड़े में जा गिरा.

चिड़ियाघर में ही पैदाइश

चिड़ियाघर के अधिकारी और पशु विशेषज्ञ डॉक्टर एन पनीरसेल्वन ने बीबीसी से बात करते हुए कहा है, "पहले जाली, फिर बाड़ और फिर अहाते की दीवार को युवक पार करता चला गया. वहां पर तैनात सुरक्षा गार्ड ने उसे रोकने की कोशिश भी की. मगर वो नहीं माना. "

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पुलिस मामले की जांच कर रही है

डॉक्टर पनीरसेल्वन का कहना है कि युवक को मारने के बाद भी इस बाघ को आदमखोर नहीं कहा जा सकता क्योंकि उसने युवक को खाया नहीं है.

उनके मुताबिक़, "बाघ ने सिर्फ़ अहाते में कूदने वाले युवक पर हमला किया और उसे मार दिया. मगर वो आदमखोर नहीं है. आदम खोर तब कहा जा सकता था जब वो उसे मारकर खा गया होता."

उन्होंने बताया, "इस बाघ को बना बनाया खाना खाने की आदत है. वो चिड़ियाघर में ही पैदा हुआ है. अगर जंगल में पैदा हुआ होता तो उसमें वैसे गुण आते."

अफरा तफरी

चिड़ियाघर में काम वाले लोगों ने भी उस वक़्त शोर सुना जब युवक बाघ के बाड़े में जा गिरा. उन्होंने बताया कि जैसे ही युवक बाघ के अहाते में गिरा, चारों तरफ अफरा तफरी मच गई थी

यहीं पर तैनात सुरक्षाकर्मी धर्मदास बताते हैं कि लोगों में जंगली जानवरों को उत्तेजित करने की प्रवृति भी ऐसी घटना का एक बड़ा कारण है.

चिड़ियाघर के अधिकारियों का कहना है कि सभी जानवरों के आहते बेहद सुरक्षित हैं और यह दुर्घटना लोगों की अपनी ग़लती की वजह से घटी है.

जिस सफ़ेद बाघ, विजय ने मंगलवार को एक युवक को मारा है उसके पूर्वजों को मध्य प्रदेश के रीवा के जंगलों से 1951 में लाया गया था. विजय सैलानियों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा है.

घटना के बाद उसे पिंजरे में बंद कर दिया गया है और चिड़ियाघर प्रशासन उसे लेकर फिलहाल ज़्यादा एहतियात बरत रहा है.

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