महाराष्ट्रः कांग्रेस-एनसीपी में भी तलाक़

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शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन टूटने के चंद मिनटों के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन भी टूट गया.

मुंबई में एक प्रेस कांफ्रेंस कर एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने इसकी घोषणा की. पवार ने कहा, ''हम हमेशा गठबंधन धर्म निभाते रहे, लेकिन कांग्रेस ने बिना सलाह के अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की है. अब हम अकेले चुनाव लड़ेंगे.''

उन्होंने कहा, ''हम अब इस संबंध में प्रदेश के राज्यपाल से मिलेंगे.''

इससे पहले प्रेस कांफ़्रेंस में एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा, ''धर्म निरपेक्षता के आधार पर महाराष्ट्र में यूपीए का गठन किया गया और हम सत्ता में आए. 2004 में जब यूपीए की स्थापना हुई तो उसमें एनसीपी की अहम भूमिका थी.''

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Image caption महाराष्ट्र में कांग्रेस से अलग होने की घोषणा अजित पवार ने की.

उन्होंने कहा, ''एनसीपी ने हमेशा कांग्रेस का साथ दिया. 15 साल से हमारा गठबंधन है. पिछले पंद्रह साल से हमारे विधायकों और सांसदों ने कांग्रेस का साथ दिया और सत्ता चलाई.''

पटेल ने कहा, ''एक समय ऐसा भी आया जब कांग्रेस विधायकों की संख्या हमसे कम थी, फिर भी हमने हमने कांग्रेस को सीएम पद देकर एक सौम्य भूमिका निभाई. दो महीने पहले हमारे नेता शरद पवार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले और कहा कि वह गठबंधन बनाए रखना चाहते हैं और सीट साझेदारी जल्द करने की मांग भी की थी.''

उन्होंने कहा, ''इसके बाद हमने कांग्रेस के बाकी नेताओं से बात की और हमने कई बार दोहराया कि अब एनसीपी एक बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है इसलिए विधानसभा में हमें अधिक सीटें चाहिए.''

उन्होंने कहा, ''जब भी लोकसभा में हमें कम सीटें मिलीं तो कांग्रेस ने दबाव बनाकर अधिक सीटें लीं. अब उसी फॉर्मूले को हमने लागू करना चाहा, जहां लोकसभा में कांग्रेस की अपेक्षा एनसीपी ने दोगुनी सीटें जीती हैं, तो कांग्रेस इनकार कर रही है.''

कांग्रेस पर आरोप

उन्होंने कहा, ''हमने आधी-आधी सीटों पर लड़ने का भी प्रस्ताव दिया. हमें आशा थी कि जल्द ही इसका नतीजा निकलेगा. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मणिक राव ने 124 सीटें देने का एक प्रस्ताव दिया था लेकिन हमने कहा कि सीटें आधी-आधी होनी चाहिए.''

पटेल ने कहा, ''हमने एक प्रस्ताव और दिया था कि इस बार मुख्यमंत्री पद पर ढाई-ढाई साल के लिए दोनों पार्टियां को मौका दिया जाए, लेकिन इस बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला.''

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उन्होंने कहा, ''पिछले एक-दो दिन से दोनों पक्षों में संवादहीनता थी. कांग्रेस के 124 सीटों के प्रस्ताव पर हमने और कोई प्रस्ताव मांगा था. लेकिन जो भी प्रस्ताव आए मीडिया के मार्फत आए, हमसे औपचारिक बातचीत नहीं हुई.''

उन्होंने कहा, ''चुनाव की तारीख़ नजदीक है और नामांकन की अंतिम तारीख़ 27 सितंबर है ऐसे में देर नहीं की जानी चाहिए, लेकिन कांग्रेस के नेताओं ने पिछली रात को एक सूची जारी कि उसमें कई उम्मीदवार उस सीट से भी खड़े कर दिए जिन पर अभी बात चल रही थी.''

उन्होंने कहा, ''हमने 15 वर्षों में कोई भी ऐसा काम नहीं किया जिससे गठबंधन धर्म को हानि पहुंचे.''

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