अमरीका में भारतीय मोदी से क्या चाहते हैं?

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भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पद संभालने के बाद पहली बार अमरीका की यात्रा पर हैं. गुजरात दंगों के कारण अमरीका ने नरेंद्र मोदी पर 10 साल तक अपने देश में प्रवेश पर पाबंदी लगाई हुई थी.

लेकिन अमरीका अब भारत के प्रधानमंत्री की हैसियत से नरेंद्र मोदी की आवभगत में लगा हुआ है.

अमरीका में रहने वाले बहुत से भारतीय और भारतीय मूल के अमरीकी भी नरेंद्र मोदी के इस दौरे पर नज़रें गड़ाए हुए हैं.

कुछ लोग तो उनके दर्शन को बेताब हैं तो कुछ उनको कामयाबी की दुआएं देते हैं. भारतीय मूल के अमरीकियों को क्या हैं मोदी से उम्मीदें?

सलीम रिज़वी की न्यूयार्क से रिपोर्ट:

जागीर सिंह ज़ेवरात की एक दुकान में काम करते हैं.

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Image caption जागीर सिंह की इच्छा नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात करने की है.

वह कहते हैं, “हमें बहुत ख़ुशी है कि हमारे मान्नीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी आ रहे हैं. और हमारी कोशिश होगी कि हम भी उनके दर्शन कर सकें.”

वहीं एक भारतीय मूल की अमरीकी महिला काकोली सेन कहती हैं, “मैं अब भी मोदी का काम देख रही हूं और परख रही हूं कि वह क्या कुछ कर पाते हैं. लेकिन शुरूआत तो अच्छी रही है अब तक. उनको बहुत से लोगों का समर्थन हासिल है और अब उन्हें दिखाना होगा कि वह क्या कर सकते हैं.”

काकोली सेन पिछले 28 वर्षों से अमरीका में रह रही हैं और मार्केटिंग के क्षेत्र में काम करती हैं.

आतंकवाद का मसला

ह्यूस्टन में इंडो अमेरिकन चेंबर ऑफ़ कॉमर्स के जगदीप अहलूवालिया कहते हैं, “हम लोग तो मोदी जी के अमरीका आने की ख़बर से बहुत ख़ुश हैं. हमें उनसे बहुत उम्मीदें हैं. अगर मोदी और ओबामा व्यापार बढ़ाने पर और अप्रवासन के मामले पर बात आगे बढ़ाते हैं तो हमारा तो काम बन जाएगा.”

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Image caption काकोली सेन अभी नरेंद्र मोदी के कामकाज को परख रही हैं.

चरमपंथी संगठन अल-क़ायदा के भारत से भर्ती करने की अपील के बीच बहुत से भारतीय मूल के अमरीकी चाहते हैं कि आतंकवाद के मामले पर भी अधिक ज़ोर दिया जाए.

न्यूजर्सी में दवा की एक कंपनी में काम करने वाले विष्णु पटेल मानते हैं कि आतंकवाद पर मोदी और ओबामा को अधिक ज़ोर देना चाहिए. वह कहते हैं, “मोदी और ओबामा को मिलकर विश्व भर में आतंकवाद का जड़ से सफ़ाया कर देना चाहिए. सबसे पहले यही काम करना चाहिए.”

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Image caption विष्णु पटेल के मुताबिक आतंकवाद की दिशा में भारत और अमरीका को मिलकर काम करना चाहिए.

अजय उपाध्याय एक व्यापारी हैं और वह कहते हैं, “हम भारतीय मूल के लोगों के लिए तो बड़ा अच्छा मौक़ा है क्योंकि विश्व स्तर पर मोदी के नेतृत्व में अपने देश का नाम अच्छा हो रहा है. व्यापार पर तो बात होगी ही लेकिन उसके साथ-साथ आतंकवाद बहुत बड़ा मुद्दा है और मोदी तो उस पर बात करेंगे ही.”

सामरिक साझेदारी की अहमियत

अमरीका और भारत के बीच सामरिक साझेदारी को भी बहुत से भारतीय मूल के लोग बहुत अहमियत देते हैं.

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भारतीय मूल की एक संस्था इंडियन अमेरिकन फ़ोरम फ़ॉर पॉलिटिकल एजुकेशन के पूर्व अध्यक्ष नीलेश मेहता कहते हैं, “मोदी की ओबामा के साथ मुलाक़ात बहुत महत्वपूर्ण है. दोनों देशों को सामरिक रिश्ते और मज़बूत करने चाहिए. रक्षा के क्षेत्र में भी अमरीका भारत में सैन्य सामानों के उत्पादन को भी बढ़ा सकता है.”

वहीं पहली बार ओबामा और मोदी के बीच होने वाली आमने सामने मुलाकात को भी कुछ भारतीय मूल के लोग बहुत अहम मानते हैं.

अहम होगी मुलाक़ात

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Image caption अमरीका में रह रहे भारतीय कारोबारी अजय उपाध्याय की भी चिंता आतंकवाद ही है.

अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के प्रशासन में शामिल रह चुके पीयूष अग्रवाल कहते हैं, “कोई भी देश ख़ासकर अमरीका अपना स्वार्थ देखता है. उस दृष्टि से ओबामा और मोदी के बीच मुलाक़ात ठीक-ठाक वातावरण में होनी चाहिए. शुरू में तो यह बहुत ज़रूरी होता है कि दोंनों एक दूसरे पर कितना भरोसा कर सकते हैं. एक दूसरे का भरोसा और सम्मान बहुत ज़रूरी हैं, बाक़ी बातें आगे बढ़ाने के लिए. यदि दो देशों के नेता एक दूसरे का सम्मान न करते हों, तो बात नहीं बनती.”

भारतीय मूल के अमरीकी संजय रामाभद्रन अमरीका के कई प्रांतों में फैली एक अमरीकी इंजीनियरिंग कंपनी के उपाध्यक्ष हैं. वह कहते हैं, “सुरक्षा के मुद्दों के साथ-साथ दोंनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने पर अधिक ज़ोर होगा. और दोंनों देशों के बीच रिश्ते मज़बूत करने में भारतीय मूल के अमरीकियों का भी बहुत अहम किरदार होगा.”

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Image caption भारतीय मूल के अमरीकी संजय रामाभद्रन मानते हैं कि दोनों देशों के रिश्तों के बीच भारतीय अमरीकियों का रोल अहम होगा.

फ़िलहाल बहुत से भारतीय मूल के लोग न्यूयॉर्क में मेडिसन स्क्वेयर गार्डन में नरेंद्र मोदी के भाषण का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं.

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