'गरबा में मुसलमानों की पहचान करनी ज़रूरी'

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भारतीय जनता पार्टी के मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने कहा है कि गरबा नृत्य में जानेवाले मुसलमानों की पहचान की ‘तसदीक़’ करनी ज़रूरी है.

नंदकुमार सिंह चौहान ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "गरबा में हिंदुओं की देवी की पूजा की जाती है, जबकि मुसलमान एकेश्वरवाद में यक़ीन करते हैं. इसलिए जब कोई मुसलमान वहां पहुंचता है तो ये जानना ज़रूरी है कि उसकी मंशा क्या है?"

हालांकि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष को मुसलमानों के होली और दीवाली के कार्यक्रमों में शामिल होने पर कोई एतराज़ नहीं है.

‘हिंदुओं से भी मस्जिद में पहचान’

मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार है और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पार्टी के उदारवादी नेता की छवि में ख़ुद को स्थापित करने की कोशिश में हैं.

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का कहना था कि अगर कोई हिंदू मस्जिद में जाकर नमाज़ अदा करना चाहेगा तो ज़ाहिर है ‘मुस्लिम भाई उससे तसदीक़ करेंगे कि तू कैसे आ गया.’

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उन्होंने कहा, "जिसको नहीं पहचानते उसके बारे में पता करना कौन सी बुरी बात है?"

वो हिंदुओं के मस्जिद में जाने पर उनकी पहचान स्थापित करने के लिए की जाने वाली पूछताछ को भी ग़लत नहीं मानते हैं.

'लोवेस्ट घाघरा नहीं'

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने ये बयान उन सवालों के जवाब में दिए जो उनसे पार्टी की एक विधायक उषा ठाकुर के संबंध में पूछे गए थे.

मध्य प्रदेश के इंदौर क्षेत्र की उषा ठाकुर ने ख़बरों के मुताबिक़ कहा है कि गरबा में उन्हें ही जाने देना चाहिए जिनके पास वैध पहचान पत्र हों. साथ ही उन्होंनें लड़कियों को बैकलेस चोलियां और कमर से नीचे वाले घाघरे न पहनने की भी सलाह दी है.

चौहान ने ठाकुर के पहचान पत्र वाले बयान को सही ठहराया हालांकि उन्होंने लड़कियों के लिबास वाले मामले पर कुछ कहने से मना कर दिया.

उन्होंने कहा कि पहचान स्थापित करने की कोशिश करने में ‘कोई बुराई नहीं है क्योंकि इस मुल्क में स्टूडंट इस्लामिक मूवमेंट जैसी संस्थाओं का जाल बिछा हुआ है और गुंडों और बदमाशों का कोई मज़हब नहीं होता है.’

‘मुसलमानों के ख़िलाफ़ नहीं’

उन्होंने बार बार दोहराया कि उनका बयान मुसलमानों या किसी ख़ास समुदाय के विरुद्ध नहीं है.

लेकिन उनसे जब ये पूछा गया कि वो ख़ासतौर पर सिमी का ही नाम क्यों ले रहे हैं जबकि भारत में दूसरी चरमपंथी संस्थाओं का भी नाम आता रहा है, तो उनका कहना था कि वो संस्थाएँ इंदौर क्षेत्र में सक्रिय नहीं हैं.

हाल के सालों में गरबा में मुसलमानों का प्रवेश एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है और कई हिंदू संगठन इसमें उनका प्रवेश रोकना चाहते हैं.

वो पूरे मामले को कथित लव जिहाद के तौर पर पेश करना चाहते हैं.

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