सभी प्रवासियों ने नहीं किया मोदी का स्वागत

  • 30 सितंबर 2014
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हर तरफ़ इस बात की चर्चा बहुत है कि कैसे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वेयर गार्डन में हज़ारों जोशीले समर्थकों को संबोधित करके उनका मन मोह लिया.

लेकिन नरेंद्र मोदी के दौरे पर जहां उनके समर्थकों में उत्साह था, तो वहीं उनके दौरे पर कुछ लोगों ने नाराज़गी भी दिखाई.

विरोध करने वालों में सिर्फ अमरीका के मानवाधिकार संगठन के कार्यकर्ता ही नहीं थे बल्कि भारतीय अप्रवासी भी थे.

पढ़ें सलीम रिज़वी की रिपोर्ट

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Image caption अमेरिका में मोदी के विरोध में प्रदर्शन भी हुए.

मोदी से नाराज़ सैकड़ों लोगों ने मैडिसन स्क्वेयर गार्डन के बाहर नारेबाज़ी करके अपना गुस्सा निकाला.

उनका विरोध खासकर वर्ष 2002 के गुजरात दंगों में उनकी कथित भूमिका और उनकी नीतियों को लेकर भी था.

हालाँकि मोदी बार-बार इस बारे में किसी तरह की नकारात्मक भूमिका का खंडन करते आए हैं और अब तक किसी भारतीय न्यायालय ने भी उन्हें दोषी नहीं ठहराया है.

इनमें भारतीय मूल के लोगों के साथ-साथ अमरीकी मानवाधिकार संस्थाओं के लोग भी शामिल थे.

विरोध प्रदर्शन का आयोजन एक मानवाधिकार संस्था अलाएंस फॉर जस्टिस एंड अकाउंटेबिलिटी ने किया था.

विरोध में एनआरआई

अलाएंस फॉर जस्टिस एंड अकाउंटेबिलिटी की प्रवक्ता प्राची पाटंकर ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में आरोप लगाए, “हम गुजरात दंगों में मोदी की भूमिका का विरोध कर रहे हैं. भारत विविधता वाला देश है जिसमें विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं. हमें लोकतंत्र वाला भारत देश चाहिए. चुनाव में भी भारत की 70 प्रतिशत जनता ने मोदी को नकार दिया है.”

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आयोजकों के मुताबिक अमरीका के कई शहरों जैसे बॉस्टन, बाल्टीमोर, फ़िलाडेल्फ़िया औऱ न्यू जर्सी प्रांत से भी प्रदर्शनकारी बसों में भरकर विरोध प्रदर्शन में पहुंचे थे.

आयोजक अपने विरोध प्रदर्शन को सफल बता रहे हैं.

एक प्रदर्शनकारी भारतीय मूल की सोनिया जोसफ़ कहती हैं, “इस विरोध प्रदर्शन से साफ़ हो गया है कि सभी भारतीय मूल के अप्रवासी लोगों ने मोदी का स्वागत नहीं किया है. बल्कि कई भारतीय मूल के लोगों ने फैसला किया कि अब समय आ गया है कि विविधता और धर्मनिर्पेक्षता को हिंदुत्व के हमलों से बचाएं.”

'माफ़ी मांगते हैं...'

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प्रदर्शन का आयोजन करने वाली संस्था का कहना है कि मोदी सरकार के 100 दिनों से ही साफ़ हो गया है कि हिंदुत्ववादी ताकतों से भारत में विविधता और कानून को कितना बड़ा खतरा है.

संस्था के मुताबिक इस दौरान देश में सैकड़ों दंगे हुए हैं और मानवाधिकार संस्थाओं जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल पर पाबंदियां लगाने के प्रयास हो रहे हैं.

प्रदर्शन में शामिल एक अमरीकी मानवाधिकार कार्यकर्ता जो लैंबर्ड कहते हैं, “हम बहुत माफ़ी मांगते हैं कि हमारे राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नरेंद्र मोदी का यहां स्वागत किया है. लेकिन हम समझते हैं कि जो अमरीकी लोग मोदी के रिकार्ड से वाकिफ़ हैं, वो उनका स्वागत नहीं करते. मैं एक अमरीकी के तौर पर मोदी का स्वागत नहीं करता हूं.”

भारत के प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद नरेंद्र मोदी पहली बार अमरीका दौरे पर आए हैं.

पिछले 10 सालों से अमरीका ने गुजरात दंगों के ही सिलसिले में मोदी के अमरीका में दाखिल होने पर पाबंदी लगा रखी थी.

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