अंबेडकर की निशानियां नष्ट होने की कगार पर

इमेज कॉपीरइट Afroz Alam Sahil

जिस संविधान की शपथ भारत में हर नेता व अधिकारी लेते हैं. आज उसी संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की अंतिम निशानियां ख़तरे में हैं.

बाबा साहब की अंतिम निशानियों को बचाने के नाम पर सरकारी फ़ाइलों के महाराष्ट्र सरकार से लेकर केंद्र सरकार के विभागों के बीच घूमने का एक अंतहीन सिलसिला पांच साल पहले शुरू हुआ था.

हाल में म्यूज़ियम के संरक्षक संजय पाटिल ने बताया कि काग़ज़ी उठापटक का ये सिलसिला आज भी जारी है.

इमेज कॉपीरइट Afroz Alam Sahil

साल 2011 में संस्कृति मंत्रालय के नेशनल म्यूज़ियम की आई एक रिपोर्ट के मुताबिक़ नागपुर शहर के चिंचोली के अंबेडकर म्यूज़ियम ‘शांतिवन’ में रखे बाबा साहब के निजी जीवन की 400 से अधिक सामग्रियां बुरी तरह से फफूंदी और दीमक का शिकार हो गई हैं. रिपोर्ट की ये जानकारियां आरटीआई से सामने आई हैं.

इनमें बाबा साहब के पहने कपड़े, उनकी सदरी, कोट, कुर्ते, बैरिस्टर गाउन, उनकी हैंडराइटिंग वाले पत्र, ग्रामोफ़ोन, छड़ी, कुर्सी, मेज़, मोज़े, टाई, पेन समेत उनका वो टाइपराइटर भी शामिल है जिसे वो उस समय इस्तेमाल कर रहे थे जब देश का संविधान लिखने की प्रक्रिया चल रही थी.

आज ही के दिन 1956 को बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने वाले अंबेडकर पर विस्तृत रिपोर्ट पढ़ें.

अफ़रोज़ आलम की ख़ास रिपोर्ट:

ख़स्ताहाल म्यूज़ियम

बाबा साहब की ऐतिहासिक स्मृतियों को संजोए अख़बार के पन्ने पीले पड़ चुके हैं. उनके निर्देशन में बनी बुद्ध की पेंटिंग और भी धुंधली हो चुकी है. इसी म्यूज़ियम में बाबा साहब की अस्थियां भी रखी हुई हैं.

इस रिपोर्ट में म्यूज़ियम के इस पूरी इमारत को तुरंत टरमाइट ट्रीटमेंट यानि दीमकों से उपचार के साथ-साथ यहां रखे सामाग्रियों के भी तत्काल केमिकल ट्रीटमेंट की बात कही गई है.

यहां तुरंत क्यूरेटर, कंज़रवेटर और सिक्योरिटी गार्ड उपलब्ध कराने को कहा गया है. म्यूज़ियम में सेंट्रल एसी की भी मांग की गई है. लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हो सका है.

इमेज कॉपीरइट Afroz Alam Sahil

यह रिपोर्ट दिल्ली स्थित नेशनल म्यूज़ियम के असिसटेंट कंज़र्वेटर कामता प्रसाद ने नवंबर 2010 में इस म्यूज़ियम का दौरा करके तैयार किया था.

हाल में इस म्यूज़ियम के संरक्षक संजय पाटिल का कहना है कि 2008 से लेकर अब तक कई पत्र केन्द्र व राज्य सरकार दोनों को ही लिखे जा चुके हैं. वे दिल्ली व मुंबई के कई मंत्रालयों का चक्कर भी लगा चुके हैं.

लेकिन वायदों के सिवा कुछ नहीं मिला. अगर ऐसा ही हाल रहा तो अगले दो सालों में बाबा साहब की तमाम निशानियां ख़त्म हो जाएंगी.

अंतिम निशानियों को बचाने के लिए सरकारी ख़तो-किताबत का सिलसिला

  • 9 जनवरी 2008- जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया, नागपुर ने पुरातत्व विभाग देहरादून को इस मामले में सहायता के लिए पत्र लिखा.
  • 25 जनवरी 2008- पुरात्तव विभाग, देहरादून ने पुरातत्व विभाग औरंगाबाद को पत्र लिखा और बाबा साहेब की अंतिम निशानियों के बारे में रिपोर्ट मांगी.
  • 25 अगस्त 2008- तत्कालीन संस्कृति मंत्री अंबिका सोनी ने नागपुर के सांसद और उस वक्त के केद्रीय मंत्री विलास मुत्तेमवार को पत्र लिखा जिसमें उन्होंने बताया कि उनके पत्र को ज़रूरी कार्यवाही के लिए एएसआई के डायरेक्टर जनरल को भेज दिया है.
  • 9 मार्च 2009- जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया, नागपुर ने पुरातत्व विभाग, दिल्ली को लिखा और अंतिम निशानियों को बचाने की ज़रूरी कार्रवाई करने को कहा.
  • 13 मार्च 2009- जियोलाजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया, कोलकाता ने पुरातत्व विभाग दिल्ली को पत्र लिखा और बताया कि पुरातत्व विभाग औरंगाबाद ने अंबेडकर म्यूज़ियम को लेकर रिपोर्ट तैयार कर ली है. कृपया आवश्यक कार्यवाही करें.
    इमेज कॉपीरइट Afroz Alam Sahil
  • नवंबर 2010- नेशनल म्यूज़ियम दिल्ली की एक टीम नागपुर जाकर निरीक्षण करती है और अपनी रिपोर्ट में इनके बुरी तरह दीमकों और कीड़े मकौड़ों के आक्रमण से ख़राब होकर नष्ट होने की बात कहती है.
  • 28 जनवरी 2011- केन्द्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय की ओर से नेशनल म्यूज़ियम दिल्ली को चिट्ठी लिखकर उनकी रिपोर्ट की बाबत ज़रूरी जानकारियां मांगी जाती हैं.
  • 19 अक्टूबर 2011— महाराष्ट्र सरकार के सामाजिक न्याय विभाग ने विदर्भ विकास पैकेज-2009 के तहत इस म्यूज़ियम के उद्धार के लिए रक़म देने की बात कही.
  • 16 दिसंबर 2011— महाराष्ट्र सरकार के नागपुर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को बताया कि वह अंतिम निशानियों को बचाने के लिए प्रस्ताव आमंत्रित कर रहा है.
  • 3 नवंबर 2012— महाराष्ट्र सरकार की ओर से नागपुर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट इस म्यूज़ियम की ख़ातिर 32 करोड़, 54 लाख, 53 हज़ार रुपए का टेंडर जारी करता है.
  • 2 जनवरी 2014- म्यूज़ियम संचालकों को एएसआई देहरादून शाखा की ओर से चिट्ठी मिलती है और उनसे बाबा साहेब की अंतिम निशानियों को बचाने की ख़ातिर 6 लाख 73 हजार, 165 रुपए मांगे जाते हैं. साथ ही कहा जाता है कि इस रक़म का भुगतान करें तभी एएसआई बाबा साहेब की इन अंतिम निशानियों को बचाने के लिए कुछ कर पाएगी. जब तक ये रुपए नहीं मिलेंगे, एएसआई कुछ नहीं कर सकती.

टाल मटोल वाला रवैया

इमेज कॉपीरइट Afroz Alam Sahil

आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया भी इस म्यूज़ियम को लेकर कई पत्र लिख चुका है. लेकिन अडिश्नल डायरेक्टर जेनरल डॉ. बीआर मणि का कहना है कि यह संग्रहालय आईएसआई के देख-रेख में नहीं आता.

आईएसआई उन्हीं ऐतिहासिक धरोहरों की देख-रेख करती है, जो सौ साल से अधिक पुराने हैं.

अम्बेडकर फाउंडेशन के डायरेक्टर जीके. द्विवेदी का कहना है कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है.

हमने संस्कृति मंत्रालय व नेशनल म्यूज़ियम के अधिकारियों से भी सम्पर्क किया. लेकिन सब इसे एक दूसरे पर टालते नज़र आए.

बाबा की दीक्षा भूमि

बाबा साहेब की धर्मपत्नी सविता अंबेडकर ने बाबा साहब की अंतिम निशानियों को नागपुर के चिंचोली स्थित इस म्यूज़ियम में सजोंकर रखने के लिए सौंपा था.

नागपुर बाबा साहब की दीक्षा भूमि है. यहीं उन्होंने अपने लाखों अनुयायियों के साथ 1956 में विजयादशमी के दिन बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी.

उनकी पत्नी की इच्छा के अनुरूप बाबा साहब के पीए रहे नानक रत्तू ने इस म्यूज़ियम की स्थापना की थी ताकि आने वाली पीढ़ी बाबा साहेब की इन अंतिम निशानियों को देखकर गौरवांवित हो सके. इनसे प्रेरणा ले सके.

जनहित याचिका

इमेज कॉपीरइट Afroz Alam Sahil

बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के जीवन से जुड़े विभिन्न सामानों को नागपुर के संग्रहालय से लेकर दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन को दिए जाने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है.

मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी व न्यायमूर्ति आरएस एंड लॉ की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए 15 अक्तूबर की तारीख़ तय की है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार