कहां हैं टी-20 विश्व कप का 'हीरो' ?

  • 4 अक्तूबर 2014
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24 सितंबर 2007...जोहानसबर्ग का वॉन्डरर्स स्टेडियम...भारत-पाकिस्तान के फ़ाइनल मैच का आख़िरी ओवर.. पाकिस्तान को जीत के लिए चाहिए 13 रन.

आख़िरी विकेट के लिए क्रीज़ पर पाकिस्तान के बल्लेबाज़ मोहम्मद आसिफ़ और मिस्बाह-उल-हक़ थे. फिर टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने लिया ऐसा फ़ैसला, जिसने दुनियाभर के क्रिकेट फैंस को हैरानी में डाल दिया. धोनी ने गेंद जोगिंदर शर्मा के हाथ में थमा दी.

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पहली ही गेंद वाइड फेंककर जोगिंदर शर्मा ने भारतीय प्रशंसकों के ग़ुस्से को और हवा दे दी. अगली गेंद पर कोई रन नहीं बना. अब पाकिस्तान को 5 गेंदों पर 12 रन की ज़रूरत थी. दूसरी गेंद पर मिस्बाह-उल-हक़ ने छक्का जड़ दिया जिसके साथ ही भारतीय फैंस की उम्मीदें आधी हो गई.

इसके बाद पाकिस्तान को जीत के लिए ज़रूरत थी चार गेंदों पर छह रन की. जोगिंदर शर्मा ने तीसरी गेंद डाली, फुल लेंथ पर मिस्बाह ने स्कूप शॉट खेला और गेंद सीधे शॉर्ट फाइन लेग पर मौजूद फील्डर श्रीसंत के हाथों में. भारत ने वर्ल्ड टी-20 विश्व ख़िताब जीता और जोगिंदर ने सबका दिल लिया.

भारत की इस इकलौती टी-20 विश्व कप जीत को सात साल पूरे हो गए हैं. इन सात सालों में काफी कुछ बदल चुका है. वर्ल्ड टी-20 2007 की जीत के हीरो जोगिंदर शर्मा फैंस की नज़रों से ग़ायब हो चुके हैं.

जोगिंदर शर्मा से बीबीसी की ख़ास बातचीत.

'चोट ने किया क्रिकेट से दूर'

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इसके बाद जोगिंदर शर्मा कहीं दिखाई नहीं दिए. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तो बिल्कुल नहीं.

जोगिंदर कहते हैं, "टी-20 विश्व कप जीत के बाद मुझे ख़राब दौर का सामना करना पड़ा. 2008 आईपीएल में मुझे कंधे और टख़ने में चोट लगी, जिसकी मुझे सर्जरी करानी पड़ी."

वो कहते हैं, "इसके बाद मैंने 2010 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में वापसी की और काफ़ी अच्छा प्रदर्शन भी किया. लेकिन फिर 2011 में मेरे साथ सड़क दुर्घटना हो गई. उसकी चोट से मैं इस साल उबरा हूं. हो सकता है मैं इस साल खेलता नज़र आऊं."

'साथी खिलाड़ी बढ़ाते हैं हौसला'

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Image caption जोगिंदर शर्मा ने चार वनडे और इतने ही टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं.

अक्सर ख़राब वक़्त में दोस्त साथ छोड़ देते हैं. लेकिन टीम इंडिया के अपने साथी खिलाड़ियों और ख़ास तौर से आईपीएल की अपनी टीम चेन्नई सुपरकिंग्स के कप्तान धोनी के जोगिंदर काफ़ी शुक्रगुज़ार हैं.

जोगिंदर कहते हैं, "जब मेरे साथ सड़क हादसा हुआ था तब सभी खिलाड़ियों चाहे धोनी हों, रैना हों, सहवाग या युवराज, सभी मेरा आत्मविश्वास बढ़ाते थे. वो सभी कहते थे कि तुम्हारे हुनर या क्षमता पर किसी को शक़ नहीं. बस तुम अपनी फ़िटनेस का ध्यान रखो."

बरक़रार है वापसी की चाहत

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आख़िरी बार 2007 में टीम इंडिया के लिए खेलने वाले जोगिंदर ने वापसी की उम्मीदें नहीं छोड़ी हैं. वो कहते हैं, "मैं अपने आप को चुनौती देता रहता हूं. 2007 से 2014 की क्रिकेट काफ़ी आगे निकल चुकी है. उसी को ध्यान में रखकर मैं मेहनत कर रहा हूं. अगर फिट रहूंगा और अच्छा सीज़न निकाल पाया तो ज़रूर वापसी करूंगा."

इस महीने 31 साल के होने जा रहे जोगिंदर ने आख़िरी घरेलू टूर्नामेंट इस साल अप्रैल में सैयद मुश्ताक़ अली ट्रॉफ़ी खेला था. 2007 विश्व कप टी-20 जीत के बाद से जोगिंदर हरियाणा पुलिस में डीएसपी हैं.

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