बेग़म अख़्तर के 10 बेहतरीन नग़मे

  • 8 अक्तूबर 2014
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जिन कुछ बेहतरीन चीज़ों के लिए बेग़म अख़्तर हमेशा-हमेशा के लिए याद की जाएंगी, उनमें 'कैसी ये धूम मचाई' (होली ठुमरी, राग काफ़ी), 'कोयलिया मत कर पुकार जियरवा लागे कटार' (दादरा), हमरी अटारिया पे आओ संवरिया' (दादरा), 'जरा धीरे से बोलो कोई सुन लेगा' (दादरा), 'ओ बेदर्दी सपने में आ जा कुछ तो बिपतियां कम हुई जाए' (दादरा) एंव 'चला हो परदेसिया नैना लगाए' (दादरा) प्रमुखता से मौजूद रही हैं.

बेग़म अख़्तर की गायी हुई दस अमर ग़ज़लों के स्मरण से उनके विशाल सांगीतिक योगदान को नमन कर सकते हैं-

1. ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया : ग़ज़ल, (शकील बदायुंनी) (सुनने के लिए क्लिक करें)

2. उल्टी हो गयी सब तदबीरें : ग़ज़ल, (मीर तकी मीर) (सुनने के लिए क्लिक करें)

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3. जिक्र उस परीवश का : ग़ज़ल, (मिर्ज़ा ग़ालिब) (सुनने के लिए क्लिक करें)

4. कुछ तो दुनिया की इनायात ने दिल तोड़ दिया : ग़ज़ल (सुदर्शन फ़ाकिर) (सुनने के लिए क्लिक करें)

5. अहले उल्फ़त के हवालों पे हँसी आती है : ग़ज़ल (सुदर्शन फ़ाकिर) (सुनने के लिए क्लिक करें)

6. वो जो हम में तुम में करार था : ग़ज़ल (मोमिन) (सुनने के लिए क्लिक करें)

7. शाम-ए-फ़िराक अब न पूछ : ग़ज़ल (फ़ैज़ अहमद फ़ैज़) (सुनने के लिए क्लिक करें)

8. इतना तो ज़िंदगी में किसी की खलल पड़े : ग़ज़ल (कैफ़ी आज़मी) (सुनने के लिए क्लिक करें)

9. ज़िंदगी का दर्द लेकर इंकलाब आया तो क्या : ग़ज़ल (शकील बदायुंनी) (सुनने के लिए क्लिक करें)

10. दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे : ग़ज़ल (बेहजाद लखनवी) (सुनने के लिए क्लिक करें)

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