तमिलनाडुः जयललिता के बिना होंगे फ़ैसले?

तमिलनाडु इमेज कॉपीरइट AFP GETTY

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता को ज़मानत नहीं मिलने से राज्य के मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम के सामने प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौतियां बढ़ गई हैं.

राज्य के मुख्यमंत्री को शासन से जुड़े प्रत्येक फ़ैसले के लिए अम्मा का दिशा निेर्देश नहीं मिल पाएगा.

राजनीतिक विश्लेषक केएन अरुण ने बीबीसी हिंदी से कहा, "इस फ़ैसले का संबंध एआईडीएमके से ज़्यादा सरकार के लिए है. जेल के बाहर रहकर सरकार पर नियंत्रण रखना एक बात है और जेल में रहते हुए सरकार पर नियंत्रण दूसरी बात है. ज़मानत याचिक खारिज़ होने वाले फ़ैसले का असर राज्य की शासन व्यवस्था पर पड़ेगा."

'निर्णय लेने का साहस'

उन्होंने कहा, "अगर मुख्यमंत्री ओ पनीरसेसल्वम को जयललिता की तरफ़ से नीतिगत फ़ैसले लेने की इज़ाजत मिलती है, तो भी यह सवाल बना रहेगा कि क्या उनके पास इस तरह के निर्णय लेने का साहस है."

Image caption जयललिता की ग़ैर मौजदूगी में पनीर सेल्वम महत्वपूर्ण नीतिगत फ़ैसले ले पाएंगे, यह एक अहम सवाल है.

हालांकि 'डेक्कन क्रॉनिकल' चेन्नई के स्थानीय संपादक भगवान सिंह की राय अरुण से अलग है, "पनीरसेल्वम क़ानून और व्यवस्था की स्थिति को संभालने में सक्षम होंगे. हालांकि यह आसान नहीं होगा."

एआईडीएमके की 'परेशानी'

भगवान सिंह कहते हैं, "सरकार के लिए परेशानी शुरु हो गई है क्योंकि विपक्ष (डीएमके और अन्य) की तरफ़ से प्रदर्शनों के कारण क़ानून और व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का आरोप लग रहा है."

उनके अनुसार सबसे महत्वपूर्ण बात है, "इस फ़ैसले ने एआईडीएमके का समर्थन कर रहे वक़ीलों में डर भर दिया है."

उन्होंने कहा, "हाई कोर्ट ने जिस तरीके से सुप्रीम कोर्ट के कई फ़ैसलों का जिक्र किया है, उससे जयललिता के समर्थक आशंकित हुए हैं. अब सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट के फ़ैसले को पलट देगा? आगे की राह एआईडीएमके के लिए मुश्किल होने वाली है."

कर्नाटक की एक विशेष अदालत ने जयललिता को आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी करार देते हुए चार साल की सज़ा सुनाई और कर्नाटक हाई कोर्ट के जस्टिस एवी चंद्रशेखर ने उनकी ज़मानत की अपील को खारिज़ कर दिया.

माना जा रहा है कि ज़मानत के लिए अब जयललिता सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी.

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