जिनकी कोशिशों से बदल गया देवास

उमाकांत उमराव इमेज कॉपीरइट SWATANTARA MISHRA

मध्य प्रदेश का देवास विर्दभ बनने से बच गया और इसकी वजह रही, इस इलाके की तालाब संस्कृति.

लेकिन इस तालाब संस्कृति की शुरुआत करने वाले उमाकांत उमराव को कम ही लोग जानते हैं.

उत्तर प्रदेश में कानपुर के पास के एक गांव में जन्मे उमाकांत उमराव ने मध्य प्रदेश के देवास में जिलाधीश के पद पर लगभग डेढ़ साल की एक छोटी सी अवधि में यहां की पारंपरिक तालाब संस्कृति को अपने बूते ज़िंदा कर दिखाया.

इसकी वजह से यहां के बच्चे-बूढ़े, औरतें सभी उनके दीवाने हो गए और उन्हें श्रद्धा से भरकर जलाधीश (जल देवता) कहकर पुकारने लगे.

गर पानी न हो?

इमेज कॉपीरइट Other

मालवा क्षेत्र के सबसे सूखे ज़िले देवास में तबादले की ख़बर सुनते ही उनके घर-परिवार और दोस्त उनपर इस बात का दबाव बनाने लगे कि किसी तरह वे अपने तबादले का आदेश रुकवा लें.

हालांकि सागर में वे अपनी पहली पोस्टिंग के पहले ही दिन वाटरशेड का काम देखने गए थे.

देवास पहुंचे तो उन्हें यह समझ में आया कि अगर पानी न हो और पर्याप्त अनाज पैदा नहीं होगा और फिर स्वास्थ्य लाभ की योजना किसी भी सूरत में कारगर नहीं हो सकती है.

देवास में पानी की समस्या को दूर करने के लिए उमराव ने 'जल बचाओ, जीवन बचाओ' की बजाए 'जल बचाओ, लाभ कमाओ' के नारे गढ़े.

पानी का अर्थशास्त्र

इमेज कॉपीरइट Other
Image caption तालाबों ने इस इलाके की खेती का पूरा ढांचा ही बदल दिया है. अब किसान तीन से चार फसल ले पाते हैं.

और इसका फ़ायदा यह हुआ कि दस बड़े किसानों को साथ लेकर शुरू की गई 'भागीरथ कृषक अभियान' आज दुनिया में तीसरे सबसे बड़े जल-संरक्षण के मिसाल के तौर पर गिनाया जाने लगा है.

2011-12 में संयुक्त राष्ट्र ने देवास जिले में जल-संरक्षण के लिए तालाब संस्कृति को ज़िंदा किए जाने और उसे विस्तार दिए जाने को दुनिया में तीसरा श्रेष्ठ उदाहरण मान लिया है.

उमाकांत ने गांव-गांव घूमकर किसानों को तालाब या पानी का अर्थशास्त्र समझाने की पहल की.

उन्होंने इस काम के लिए किसानों को बैंक से कर्ज भी दिलवाया.

किसानों को फ़ायदा

इमेज कॉपीरइट Thinkstock

बैंक के पास तालाब के लिए ऋण देने की कोई व्यवस्था नहीं थी तो इस हालत में उमराव ने किसानों के कर्ज के बदले में खुद गारंटी लेनी शुरू कर दी और एक-दो साल में ही किसानों को इसका फ़ायदा दिखने लगा.

यहां के किसान एक की बजाय अब दो-तीन और चार फसलें लेने लगे हैं.

अब आलम यह है कि देवास जिले के कई गांव ऐसे हैं जहां 100-125 से ज़्यादा तालाब हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार