सोना जीत लाईं मनदीप, ससुराल में ख़ुशियाँ

मनदीप कौर, एशियाई खेलों क स्वर्ण पदक विजेता, इंचियोन, दक्षिण कोरिया इमेज कॉपीरइट Daljit Ami

एशियाई खेलों में लगातार दो बार स्वर्ण पदक जीतना अपने-आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है.

अगर आप दो एशियाई खेलों के बीच दूसरे किसी मुक़ाबले में भाग ना ले सके हों तो इस उपलब्धि के मायने और भी बढ़ जाते हैं.

इससे भी आगे अगर आप चोटिल रही हों और डोपिंग विवाद में भी फंसी हो तो इस जीत का स्वाद कैसा होगा?

यह इंचियॉन एशियाई गेम्स में चार गुणा चार सौ मीटर रिले दौड़ में सोने का पदक जीतने वाली मनदीप कौर की कहानी है.

मनदीप को फाइनल के तीसरे लैप में दौड़ते वक़्त यह सब याद रहा होगा इसीलिए वह जीत की बात करते हुए दो एशियाई खेलों के बीच के चार सालों के संघर्ष को सलाम करती हुई लगती हैं.

पढ़िए दलजीत अमी की कहानी विस्तार से

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Image caption मनदीप कौर अपने पति हरपिंदर सिंह के साथ. वो कहती हैं उनके पति ने उनका बहुत साथ दिया.

मनदीप कौर का जब उनके ससुराल में स्वागत किया गया तो उन्होंने अपनी बात पिछले चार सालों में मदद करने वालों का धन्यवाद देते हुए शुरू की.

इस बार इंचियॉन एशियाई खेलों में चार गुणा चार सौ मीटर रिले दौड़ में प्रियंका पंवार, टिंटू लूका और पूवम्मा के साथ मिल कर मनदीप कौर ने नया एशियाई रिकॉर्ड बनाया.

इस बार यह दौड़ भारत ने 3:28.68 के समय में जीती जबकि 3:29.02 का पुराना रिकॉर्ड भी ग्वांग्जो खेलों में 2010 में भारत ने ही बनाया था.

भारत ने 2002 के बुसान गेम्स से लेकर इंचियोन तक लड़कियों की चार गुणा चार सौ मीटर रिले दौड़ लगातार चौथी बार जीती हैं.

डोप टेस्ट

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पिछले एशियाई खेलों की टीम से सिर्फ मनदीप कौर ही इस बार की टीम में थीं.

ग्वांग्जो एशियाई गेम्स के बाद मनदीप कौर पर डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद पाबंदी लगाई गई थी.

मनदीप में अपील की कि अगर कोई पाबंदीशुदा दवाई उनके टेस्ट में आई है तो वह जानकारी न होने की वजह से किसी एप्रूव्ड मेडिसिन में शामिल होने के कारण है.

बाद में जाँच में भी पाया गया कि यह महज एक ग़लती थी जबकि दवाई पर पाबंदीशुदा सब्सटेंस का नाम तक नहीं था. मनदीप कौर पर पाबंदी हटी तो वह चोटिल हो गईं.

मनदीप बताती हैं कि इस दौरान उनके पति हरपिंदर सिंह ने उनका खूब साथ दिया जो खुद साइक्लिंग के कोच हैं.

अपने ख़र्च पर तैयारी

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एशियाई खेलों की तैयारी के लिए मनदीप कौर ने अपने ख़र्च पर दो महीने थाईलैंड में अभ्यास किया.

हरपिंदर सिंह बताते हैं कि थाईलैंड में मनदीप कौर का प्रदर्शन बेहतर हुआ. एशियाई खेलों के ट्रायल में जब मनदीप कौर शामिल हुईं तो यह उनकी ग्वांग्जो एशियाई खेलों के बाद मुक़ाबले वाली पहली दौड़ थी. उन्होंने नई टीम के साथ दस दिन बैटन एक्सचेंज करने का अभ्यास किया.

अपने घरवालों और रिश्तेदारों के बीच घिरी हुई मनदीप बताती हैं कि प्रियंका पंवार के पिछड़ जाने के बाद टिंटू लूका ने बढ़त बनाई और मनदीप ने निर्णायक बढ़त के साथ बैटन पूवम्मा को थमाया.

मनदीप कहती हैं, "इस जीत से मैंने साबित कर दिया कि मैं क्या हूँ."

जश्न का मौक़ा

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इससे पहले एशियाई खेलों और कॉमनवेल्थ खेलों में सोने के पदक जीतने वाली और 2008 के ओलंपिक खेलों में 400 मीटर दौड़ में भाग लेने वाली मनदीप कौर के लिए यह जश्न का सही मौक़ा है.

सड़कों पर उनके स्वागत के बैनर लगे हैं. सभी उनके साथ फोटो खिंचवाना चाहते हैं और उनके ससुर केसर सिंह ने पार्टी का बंदोबस्त किया है.

उनकी जीत से फतेहगढ़ साहिब ज़िले का छोटा सा गांव बढ़गुज़रां ख़ुशी से झूम उठा है.

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