हाईकोर्ट ने स्नूपगेट आयोग रद्द किया

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गुजरात में एक महिला की कथित निगरानी की जांच के लिए गठित स्नूपगेट आयोग को गुजरात उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है.

गुजरात सरकार की ओर से महिला की जासूसी से संबंधित ये मामला साल 2009 में तब सामने आया था जब फ़ोन पर कई बार हुई बातचीत गुजरात के एक पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जीएल सिंघल ने रिकॉर्ड कर ली.

जासूसी करते हुए की गई इस रिकार्डिंग में एक व्यक्ति को पुलिस अधिकारी से यह कहते सुना गया कि 'साहेब' ने एक लड़की की गतिविधियों पर हर पल नज़र रखने को कहा है.

इसके बाद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगे कि वही टेप में 'साहेब' थे और फ़ोन पर पुलिस अधिकारी को निर्देश देने वाले व्यक्ति अमित शाह थे.

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Image caption अमित शाह पर युवती की निगरानी की बात करने के आरोप हैं.

भाजपा ने तब आरोपों से बचाव करते हुए कहा था कि महिला के पिता नरेंद्र मोदी के परिचित थे और वे अपनी बेटी की सुरक्षा को लेकर आशंकित थे इसीलिए उनके आग्रह पर ही महिला की सुरक्षा के लिए उनकी निगरानी की जा रही थी.

इस मामले की जांच के लिए राज्य और केंद्र सरकार ने जांच आयोग के गठन के आदेश दिए.

लेकिन जिस महिला की गतिविधियों पर कथित तौर पर गुजरात सरकार के कहने पर नज़र रखी जा रही थी उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दी कि मामले की जाँच रोकी जाए क्योंकि उनके पिता के कहने पर गुजरात सरकार उन पर नज़र रख रही थी और उनके फोन टैप किए जा रहे थे.

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