नोबेल पुरस्कार से कितना सँवरेगा बचपन?

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बाल मज़दूरों की मुक्ति के लिए काम करने वाले भारतीय कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान में बच्चों की शिक्षा की मुहिम से जुड़ी 17 बरस की मलाला यूसुफ़ज़ई को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है.

तो क्या अब ये उम्मीद की जानी चाहिए कि कारख़ानों, चाय की दुकानों, मोटर गैराज़ों और खेतों में हाड़तोड़ मेहनत करने वाले बच्चों की ओर सरकार और समाज की नज़र जाएगी?

क्या उनकी ज़िंदगी में स्थायी तौर पर बदलाव आ सकता है? या फिर वो जहाँ के तहाँ बने रहेंगे?

इस बार इंडिया बोल में इसी विषय पर होगी चर्चा. आपके सवालों के जवाब देंगे, खुद कैलाश सत्यार्थी. हमें अपने सवाल भेजें.

कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए इस शनिवार 11 अक्तूबर को भारतीय समय के मुताबिक़ शाम साढ़े सात बजे मुफ़्त फ़ोन कीजिए

1800-11-7000 और 1800-1-2-7001 पर.

और आप हमें bbchindi.indiabol@gmail.com पर अपने नंबर भेज सकते हैं.