मोदी-ज़करबर्ग मुलाक़ात के मायने

  • 10 अक्तूबर 2014
मार्क ज़करबर्ग और नरेंद्र मोदी इमेज कॉपीरइट PIB

एक ने लोगों को ऑनलाइन पर एक साथ लाकर अरबों डॉलर कमाए हैं तो दूसरा ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की ऑनलाइन पसंद बनकर भारत का प्रधानमंत्री बना है.

फ़ेसबुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क ज़करबर्ग की भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात हुई है. दोनों के बीच बात क्या होगी, मुलाक़ात से पहले इसके बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी गई.

मगर दोनों के डिजिटल प्रेम को देखकर ये क़यास लगाना मुश्किल नहीं है कि मुलाक़ात का मुद्दा भारत में अधिक से अधिक लोगों तक इंटरनेट मुहैया कराना रहा होगा.

जब ज़करबर्ग से पूछा गया था कि भारत के प्रधानमंत्री से मुलाक़ात के दौरान वे क्या चाहेंगे तो उन्होंने बीबीसी से कहा, “उनके साथ मेरा अधिकतर वक़्त उन्हें सुनने और ये सीखने में बीतेगा कि हम कैसे मदद कर सकते हैं. मोदी ने डिजिटल इंडिया कार्यक्रम शुरू किया है. हम इसमें मदद करने के लिए उत्साहित हैं.”

उन्होंने कहा कि भारत में छह लाख गाँव अभी भी इंटरनेट की पहुँच से दूर हैं और वे जानते हैं कि मोदी इन गाँवों तक इंटरनेट ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

ऑनलाइन लोग

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अमेज़न के सीईओ जेफ़ बेजोस और माइक्रोसॉफ़्ट के सीईओ सत्या नडेला के बाद मोदी से मुलाक़ात करने वाले वे इंटरनेट जगत से जुड़े तीसरे बड़े तकनीकी क्षेत्र के दिग्गज हैं.

ज़करबर्ग के अभियान इंटरनेट डॉट ओआरजी का उद्देश्य भी ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को ऑनलाइन लाना ही है.

इस अभियान में सोशल नेटवर्क वेबसाइट फ़ेसबुक के साथ एरिक्सन, मीडियाटेक, नोकिया, ओपेरा, क्वालकॉम और सैमसंग सहित कई अन्य बड़ी कंपनियाँ पाँच अरब लोगों को ऑनलाइन लाने के लिए आगे आई हैं.

भारत और अन्य विकासशील देशों में मोबाइल इंटरनेट की दरें घटाकर अधिक से अधिक लोगों को ऑनलाइन लाना ही इस अभियान का उद्देश्य है.

इंटरनेट सेवाएं

जब ज़करबर्ग से पूछा गया कि भोजन, पानी, शौचालय और बिजली जैसे मूल मुद्दों से जूझ रहे विकासशील देशों के लिए इंटरनेट पहुँच क्या वाक़ई में वास्तविक मुद्दा है तो उन्होंने कहा कि वे सिर्फ़ तकनीक की वकालत नहीं कर रहे हैं बल्कि यह लोगों का जीवन बेहतर करने का ज़रिया बननी चाहिए.

उन्होंने कहा कि फ़ेसबुक साफ़ पानी मुहैया कराने के बजाए इंटरनेट आधारित सेवाओं के ज़रिए मदद पहुँचाने के लिए ज़्यादा उपयुक्त है.

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Image caption क़रीब 11 करोड़ भारतीय फ़ेसबुक पर हैं लेकिन ज़करबर्ग की नज़र उन पर है जो अभी फ़ेसबुक से नहीं जुड़े हैं.

इस दिशा में पहला क़दम उठाते हुए फ़ेसबुक भारत की सबसे बड़ी मोबाइल नेटवर्क कंपनी एयरटेल के साथ मिलकर एक योजना पर काम कर रही है.

इसी साल फ़ेसबुक ने जांबिया में एक फ्री इंटरनेट एप्लीकेशन 'ममा' शुरू की जिसके ज़रिए गर्भवती महिलाएं मातृत्व और स्वास्थ्य के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकती हैं. सरकार भी एचआईवी जैसी बीमारियों के बारे में जानकारियाँ बांट सकती है. इस एप्लीकेशन के ज़रिए लोग फ़ेसबुक ब्राउज़ करने के साथ-साथ नौकरियों और शिक्षा से जुड़ी अन्य जानकारियाँ भी खोज सकते हैं.

बड़ा बाज़ार

गुरुवार को दिल्ली में जब ग्रे टी-शर्ट और जींस पहने तीस साल के मार्क ज़करबर्ग सूट और साड़ी पहने चुनिंदा लोगों को संबोधित कर रहे थे तब वे असल में वे फ़ेसबुक को ही प्रमोट कर रहे थे.

हालांकि उनकी नज़र हॉल में बैठे चुनिंदा लोगों पर नहीं बल्कि उन लाखों भारतीय युवाओं पर थी जो फ़ेसबुक के उपभोक्ता हो सकते हैं.

समय फ़ेसबुक के लिए दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार भारत जल्द ही सबसे बड़ा बाज़ार बन सकता है.

भारत के 24.3 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ताओं में से 11 करोड़ पहले से ही फ़ेसबुक पर हैं. हालांकि अभी भी भारत में एक अरब से अधिक लोगों की पहुँच इंटरनेट तक नहीं है.

चुनौतियां

उन्होंने भारत में इंटरनेट के सामने तीन चुनौतियाँ का उल्लेख किया. ढांचागत क्योंकि 2जी और 3जी सेवाएं मुहैया नहीं हैं, आर्थिक क्योंकि इंटरनेट बहुत महंगा है और सामाजिक क्योंकि अभी भी महिलाएं इंटरनेट से दूर हैं.

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उन्होंने कहा कि महिलाओं को ऑनलाइन तभी लाया जा सकता है जब उनकी भाषाओं में अधिक कंटेंट मुहैया कराया जाए.

ज़करबर्ग ने कहा कि इन तथ्यों को नकारा नहीं जा सकता है.

उन्होंने कहा कि लाखों लोगों के जीवन को एक बार में बदल देने का विचार उत्साहवर्धक है.

उन्होंने कहा कि वह हार्वर्ड के एक कमरे से फ़ेसबुक शुरू कर पाए क्योंकि वहाँ इंटरनेट कनेक्टविटी की समस्या नहीं थी.

जब एक अरब लोग ऑफ़लाइन होते हैं तो दुनिया उनकी रचनात्मकता और विचारों को खो देती है. जब आप उन्हें ऑनलाइन लाते हैं तो सिर्फ़ उनका ही जीवन नहीं बदलते बल्कि दुनिया को भी बेहतर बनाते हैं.

लेकिन एक अरब लोगों को ऑनलाइन लाकर सिर्फ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डिजिटल इंडिया का सपना ही पूरा नहीं होगा बल्कि फ़ेसबुक जैसी इंटरनेट कंपनियों को भी इससे आर्थिक फ़ायदा होगा.

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