भारतीय फ़ुटबॉल को मिलेगी नई किक?

फ़ुटबॉल इंडियन सुपर लीग, कोलकाता

भारत में फ़ुटबॉल लीग आईएसएल (इंडियन सुपर लीग) शुरू हो रही है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता में इसका उद्घाटन कर रही हैं.

इस नए टूर्नामेंट से भारतीय फ़ुटबॉल के व्यावसायीकरण के साथ ही 2026 के फ़ीफ़ा विश्व कप में भारत की भागीदारी को लक्ष्य बनाया गया है.

टूर्नामेंट को लेकर विज्ञापन जगत तो उत्सुक है, लेकिन आम दर्शकों में टिकट ख़रीदने को लेकर ज़्यादा उत्साह नहीं दिखा.

पढ़ें आख़िर क्यों है फ़ुटबॉल लीग की ज़रूरत?

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Image caption मशहूर पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली कोलकाता की टीम के संयुक्त मालिक हैं.

एटलेटिको कोलकाता टीम की पोशाक का रंग लाल है और उसी लाल रंग के पोस्टरों से कोलकाता का साल्ट लेक स्टेडियम छाया हुआ है.

लीग का पहला मुक़ाबला मुंबई और कोलकाता के बीच खेला जा रहा है.

आई लीग और संतोष ट्राफ़ी जैसे राष्ट्रीय टूर्नामेंट के रहते हुए इस नई लीग की क्या ज़रूरत है?

इस पर आल इंडिया फ़ुटबॉल एसोसिएशन के महासचिव कुशाल दास का कहना है, "दूसरे टूर्नामेंट का व्यावसायीकरण नहीं हो पा रहा था. कोई बड़ा टीवी चैनल उनका प्रसारण नहीं कर रहा था. इसीलिए आईएसएल की योजना बनाई गई ताकि कॉरपोरेट संस्थान इसमें निवेश करें और कोई बड़ा चैनल इसे दिखाए. साथ ही ग्लैमर वर्ल्ड भी इसके साथ जुड़े."

कुशाल का मानना है कि अगर यह लक्ष्य पूरा हो जाता है तो इससे दूसरी फ़ुटबॉल प्रतियोगिताओं को भी फ़ायदा होगा.

फ़ीफ़ा विश्वकप

इस प्रतियोगिता के ज़रिए 2026 के फ़ीफ़ा विश्वकप के लिए भारतीय टीम तैयार करने की भी योजना है.

कुशाल कहते हैं, "भारतीय फ़ुटबॉल की उन्नति के साथ ही अगले दस सालों में दस लाख नए खिलाड़ी तैयार करना भी हमारा लक्ष्य है ताकि 2026 के फ़ीफ़ा विश्व कप में भारत भाग ले पाए."

सौरव गांगुली और कोलकाता के तीन वाणिज्यिक संस्थानों ने स्पेन की लीग के जाने-माने फ़ुटबॉल क्लब एटलेटिको मैड्रिड से मिलकर एटलेटिको कोलकाता टीम बनाई है.

कोलकाता टीम के संयुक्त मालिक उत्सव पारिख ने बीबीसी को बताया कि पुराने ज़माने के क्लब जो नहीं कर पाए, अब उसे करने का प्रयास है.

उत्सव पारिख कहते हैं, "हर एक क्लब का बजट बहुत सीमित होता है. सीमित फंड के साथ ज़्यादा कुछ करना मुश्किल हो गया था. इसलिए कॉरपोरेट संस्थानों को फ़ुटबॉल में आना चाहिए. जो ज़्यादा पैसा लगा सकें. आईएसएल वही करने जा रहा है. ज़्यादा पैसा निवेश किया गया तो अच्छे विदेशी फ़ुटबॉलर ला सकेंगे और बाक़ी स्थानीय खिलाड़ियों को भी उनसे सीखने का मौक़ा मिलेगा."

विदेशी खिलाड़ी

आईएसएल टूर्नामेंट में आठ शहरों की आठ टीमें होंगी. हर टीम में कई विदेशी खिलाड़ी हैं. कोलकाता की पूरी टीम ने एक महीने स्पेन की राजधानी मैड्रिड में अभ्यास किया है.

कोलकाता टीम के सदस्य राकेश मसीह कहते हैं, "एक महीने तक रहना, खाना, अभ्यास, घूमना सब कुछ साथ हुआ. वरिष्ठ खिलाड़ी हमारी कमियों की चर्चा करते थे और हमें सिखाते थे. "

भारतीय फ़ुटबॉल की चर्चा अक्सर बंगाल और गोवा तक सीमित रह जाती है. लेकिन आईएसएल ने उत्तर पूर्वी भारत को भी टूर्नामेंट में शामिल किया है, जहां से एक से बढ़कर एक राष्ट्रीय खिलाड़ी आए हैं.

आईएसएल से उत्तर-पूर्व भारत को कितना फ़ायदा होगा इस पर असम की वरिष्ठ खेल पत्रकार प्रार्थना हज़ारिका कहती हैं, "असम या उत्तर-पूर्व भारत में फ़ुटबॉल क्रिकेट से कई गुना ज़्यादा लोकप्रिय है. शिलॉन्ग का लाजॉन्ग फ़ुटबॉल क्लब बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है."

उत्तर-पूर्व के सितारे

Image caption बाइचिंग भूटिया भारत के सबसे चर्चित फ़ुटबॉल खिलाड़ियों में माने जाते हैं.

वो कहती हैं, "बाइचिंग भूटिया से लेकर एक से एक सितारे उत्तर-पूर्व से ही आए हैं. नार्थ-ईस्ट यूनाइटेड में जो खिलाड़ी खेलेंगे उन्हें विदेशी खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौक़ा मिलेगा. दूसरे बच्चों को भी आत्मविश्वास मिलेगा."

आईएसएल को लेकर विज्ञापन जगत में भी काफ़ी उत्साह है. इसका प्रसारण स्टार टीवी पर होगा. स्टार के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि विज्ञापन का 10 सेकेंड का स्लॉट एक लाख 20 हज़ार से एक लाख 25 हज़ार रुपए तक में मिल रहा है.

साल्ट लेक स्टेडियम में सीटों की संख्या एक लाख से घटाकर 68 हज़ार कर दी गई है फिर भी टूर्नामेंट शुरू होने से तीन दिन पहले तक मात्र 20 हज़ार टिकट बिके थे.

शायद यही कारण है कि 10 हज़ार सीटें छात्रों के लिए और अन्य कई हज़ार विभिन्न फ़ुटबॉल क्लबों को 50 प्रतिशत कम दाम में टिकट दिए जाने का फ़ैसला लिया गया है.

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