'दलगत राजनीति से समाज में बदलाव संभव नहीं'

कैलाश सत्यार्थी और मलाला युसुफजई इमेज कॉपीरइट AFP

2014 का शांति का नोबेल पुरस्कार पाने वाले कैलाश सत्यार्थी का मानना है कि चुनाव या राजनीतिक दल समाज में बदलाव नहीं ला सकते.

मलाला के साथ शांति का नोबल पुरस्कार साझा करने वाले बाल अधिकार कार्यकर्ता और गैरसरकारी संगठन 'बचपन बचाओ आंदोलन' से जुड़े कैलाश सत्यार्थी ने बीबीसी हिंदी रेडियो से बातचीत में यह बात कही.

उनका कहना था कि समाज को बदलने का आंदोलन दलगत राजनीति में रहते हुए नहीं किया जा सकता.

उनका कहना है, "जो भी जनांदोलन है वह राजनीतिक है. लेकिन हम दल की राजनीति नहीं करते हम जन की राजनीति करते हैं."

बाल अधिकार और 'बचपन बचाओ आंदोलन' से जुड़े अभियान की शुरुआत कैलाश सत्यार्थी ने स्वामी अग्निवेश के साथ मिलकर की थी.

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption पाकिस्तान की मलाला युसुफ़ज़ई को बालिका शिक्षा के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए नोबेल शांति सम्मान मिला है.

बाद में मतभेद हुए तो दोनों के रास्ते अलग हो गए.

जन की राजनीति

स्वामी अग्निवेश से मतभेदों को लेकर उनका कहना था कि उनके बीच निजी मतभेद नहीं बल्कि तरीक़ों के मतभेद रहे.

"हमारी सोच में अंतर है. उनका मानना है कि चुनाव या राजनीतिक दल के माध्यम से समाज में बदलाव आएगा. मगर मैं यह नहीं मानता."

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की ओर से किसी तरह का बधाई संदेश न मिलने पर कैलाश सत्यार्थी ने कहा, "मैंने अपने अभियान में साथ देने के लिए मलाला युसुफज़ई को आमंत्रित किया है. मुझे विश्वास है कि वे इसमें शामिल होंगी."

वह कहते हैं, "जब हम एक राजनीतिक पार्टी बनाते हैं या किसी राजनीतिक दल में शामिल होकर चुनाव लड़ते हैं तो आप पर एक ठप्पा लग जाता है. इससे सामाजिक आंदोलन उतनी आज़ादी और खुलेपन के साथ नहीं हो पाता, जितना आप दलगत राजनीति से अलग होकर चला सकते हैं."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार