मोहम्मद रफ़ी के बेटे चुनाव मैदान में

शाहिद रफ़ी, मोहम्मद रफ़ी के बेट

महाराष्ट्र की राजनीति में यह नया चेहरा मशहूर गायक मोहम्मद रफ़ी के 52 वर्षीय बेटे शाहिद रफ़ी का है.

वह दक्षिण मुंबई के मुम्बादेवी चुनाव क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार अतुल शाह के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

देखें: शाहिद रफ़ी से ज़ुबैर अहमद की बातचीत

शाहिद रफ़ी जैसे नए चेहरों और उम्मीदवारों के भरोसे हैदराबाद की पार्टी एआईएमआईएम महाराष्ट्र विधानसभा में खाता खोलना चाहती है. पार्टी ने पहली बार यहां से 14 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं.

पढ़िए ज़ुबैर अहमद की पूरी रिपोर्ट

मैं दक्षिण मुंबई के मुस्लिम इलाक़े भिंडी बाज़ार में शाहिद रफ़ी के चुनावी दफ़्तर में उनका इंतज़ार कर रहा था. दफ़्तर में चुनाव चिह्न के पोस्टर लगे थे.

बाहर एक प्रचार गाड़ी के चारों तरफ शाहिद रफ़ी की तस्वीरें लगी थीं. उनके पिता की तस्वीर भी नज़र आ रही थी.

Image caption शाहिद के बारे में कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने ग़लत पार्टी का चुनाव किया है.

शाहिद रफ़ी जब अपने साथियों से दफ़्तर के बाहर बातें कर रहे थे तब भी इर्द-गिर्द खड़े लोग उनकी तरफ़ ध्यान नहीं दे रहे थे.

रैली के बाद शाहिद रफ़ी से हमने पूछा सियासत में आने का मक़सद? वो बोले, "लोगों की उसी तरह से ख़िदमत करनी है जैसी अब्बा किया करते थे."

एक नया तजुर्बा

लेकिन हर नेता चुनाव से पहले लोगों की सेवा का दावा करता है. रेडीमेड कपड़ों के व्यापारी शाहिद रफ़ी बोले, "मैं उस इंसान का बेटा हूं जो अपनी ज़बान पर सब काम करते थे. तो मैं उनका नाम गिरने नहीं दूंगा."

शाहिद रफ़ी से मैंने पूछा सियासत में कैसा लग रहा है? तो वे बोले, "बड़ी मेहनत है. थक भी जाता हूं, लेकिन मज़ा भी आ रहा है क्योंकि यह नया तजुर्बा है."

ग़लत पार्टी का चुनाव?

मुझसे कई लोगों ने कहा कि शाहिद रफ़ी अपने पिता की तरह नेक इंसान हैं, लेकिन पार्टी ग़लत चुनी.

इस पर वो बोले, "हर पार्टी वादे करती है लेकिन मजलिस काम करती है इसीलिए मैंने यह पार्टी चुनी और वैसे भी विरोधी लोग इस तरह की बातें कहते हैं."

मैंने पूछा कि अपने चुनाव क्षेत्र एक बड़ा मुद्दा बताइए तो कहने लगे मुद्दे अनेक हैं. मैंने कहा अगर आप जीते तो आपकी प्राथमिकता क्या होगी? वो कहने लगे कि जब जीत कर आऊंगा तो सभी मुद्दों पर काम करूंगा.

चुनाव, वादे और उम्मीद

इस इलाक़े में पुरानी इमारतों के गिरने, ट्रैफ़िक जाम और पार्किंग की कमी जैसी समस्याएँ हैं. उनके विरोधी अतुल शाह इन्हें हल करने के वादे पर चुनाव लड़ रहे हैं.

शाहिद मानते हैं कि वोट उन्हें उनके अब्बा के नाम पर मिलेंगे. वो कहते हैं, "अब्बा की लोग पूजा करते हैं. उनसे लोगों को मोहब्बत है. तो ज़ाहिर सी बात है इससे बहुत फ़र्क़ पड़ेगा."

शाहिद रफ़ी का कहना है कि उनकी जीत मुसलमानों के वोटों की वजह से नहीं होगी बल्कि उनके अब्बा को चाहने वाले हर समुदाय के लोग हैं.

वैसे उनके अनुसार "हार-जीत अल्लाह के हाथ में है."

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