मुंबईः चुनाव में सुरक्षा कोई मुद्दा नहीं

मुंबई, समंदर का किनारा

मुंबई में पिछले विधानसभा चुनाव में सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा था क्योंकि इसके एक साल पहले शहर एक ज़बरदस्त आतंकवादी हमले का शिकार हुआ था जो लगातार तीन दिनों तक चला था और जिसमे 266 लोग मारे गए थे.

इस बार के विधान सभा चुनाव में शहरी और ग्रामीण मतदाता के लिए भले ही सुरक्षा चुनावी मुद्दा नहीं है पर मछुआरे सुरक्षा के मुद्दे पर वोट कर सकते हैं.

साल 2008 के बाद मुंबई शहर में कोई चरमपंथीहमला नहीं हुआ है. लेकिन मुंबई के मछुआरों के लिए ये अब भी एक बड़ा मुद्दा है और वो इस बात से हैरान हैं कि किसी भी राजनीतिक दल ने इसे मुद्दा क्यों नहीं बनाया.

जनवरी में एक सरकारी रिपोर्ट में कहा गया था कि मुंबई में दोबारा हमले का प्रयास किया जा रहा है.

विस्तार से पढ़िए ज़ुबैर अहमद की रिपोर्ट

मैं महाराष्ट्र के मछुआरों के अध्यक्ष दामोदर टंडेल से मिलने उनके घर दक्षिण मुंबई के बुधवार पार्क गया.

समुद्र के किनारे आबाद इसी मोहल्ले में दस पाकिस्तानी चरमपंथी एक नाव से उतरे थे और यहीं से दो-दो की टुकड़ियों में बँट कर पाँच टैक्सियों में सवार होकर मुंबई के प्रसिद्ध जगहों पर हमले किए थे.

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दामोदर टंडेल सियासी पार्टियों और सरकारों से काफ़ी नाराज़ थे.

उन्होंने कहा, "भारत की स्वंत्रता के बाद से जितनी भी सरकारें आई हैं किसी ने महाराष्ट्र के 720 किलोमीटर लंबे समुंद्री किनारों में आबाद मछुआरों की सुरक्षा के लिए अब तक कुछ नहीं किया है. पिछली सरकार ने भी कुछ नहीं किया".

सुरक्षा के साथ 'समझौता'

वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी नाराज़ थे, "मुंबई हमलों के बाद यहाँ सुरक्षा अकादमी बनने का काम हो रहा था. मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उसे अहमदाबाद भेज दिया गया. मुंबई की सुरक्षा के साथ समझौता किया गया."

Image caption मछुआरों के अध्यक्ष दामोदर टंडेल कहते हैं कि मुंबई की सुरक्षा के साथ समझौता किया गया है.

दामोदर टंडेल के अनुसार इस बार चुनाव में किसी पार्टी ने भी सुरक्षा को चुनावी मुद्दा नहीं बनाया.

वो कहते हैं, "जनवरी की एक रिपोर्ट के अनुसार कोस्ट गार्ड ने समुद्री किनारों पर कई जगहों पर जाँच की तो पता चला कि जिन मछुवारों को स्मार्ट कार्ड और पहचान पत्र दिए गए थे उनमें से 60 प्रतिशत बांग्लादेशी और नेपाली थे".

इसकी जांच के आदेश भी नहीं दिए गए.

समुद्री रास्तों की सुरक्षा

उनका कहना था कि अब भी अगर कोई अवैध आदमी समुद्र के रास्ते मुंबई में घुसना चाहे तो 90 प्रतिशत संभावना यही है कि वो पकड़ा नहीं जाएगा.

Image caption मुंबई में विधान सभा चुनाव के दौरान सुरक्षा इस बार कोई मुद्दा नहीं है.

वो कहते हैं, "समुद्र खुला है. कोस्ट गार्ड का पहरा हर जगह नहीं है. हाल में दो पुलिस वाले नाव से गिरे तो समुद्र में डूब गए क्योंकि उन्हें तैरना भी नहीं आता था. ये तो हाल है सुरक्षाकर्मियों का."

दामोदर टंडेल ने पिछली सरकार को सुझाव दिया था कि पढ़े लिखे युवा मछुआरों को अगर ट्रेनिंग मिले तो वे समुद्री रास्तों की सुरक्षा बेहतर तरीके से कर सकते हैं.

क्या है अपेक्षा?

Image caption मुंबई शहर के लिए समुद्री रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करना काफ़ी अहम है.

लेकिन उन्हें अफ़सोस है कि सरकार ने उनके सुझाव को नहीं सुना.

टंडेल चाहते हैं कि इस विधान सभा चुनाव के बाद सरकार किसी की भी हो समुद्री किनारों पर रहने वालों और महाराष्ट्र के समुद्री इलाक़ों की सुरक्षा का एक पूरा जाल बिछाया जाए.

उनका सुझाव और उनका भय अपनी जगह पर सही होगा लेकिन ये भी सही है कि 2008 के बाद मुंबई में आतंकी हमले नहीं हुए हैं.

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