क्यों गिर रहे हैं वायुसेना के विमान?

  • 16 अक्तूबर 2014
भारतीय वायुसेना का एक दुर्घटनाग्रस्त विमान इमेज कॉपीरइट AFP

पुरानी हो चुकी भारतीय वायुसेना क्या अब आसमान से नीचे आ रही है? दुनिया की सभी वायुसेनाओं में दुर्घटनाएं होती हैं. लेकिन भारतीय वायुसेना के विमानों का प्रशिक्षण के दौरान दुर्घटनाग्रस्त होना अब रोज़मर्रा की बात हो गई है.

हालिया वाकया इस हफ़्ते के शुरू का है, जब रूस में बना सुखोई-30 विमान पूर्वी भारत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इसके दोनों पायलट विमान से निकलने में सफल रहे. इससे उनकी जान बच गई.

इस साल मार्च में अमरीका में बना मालवाहक विमान हरक्युलिस प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस हादसे में चालक दल के पांच सदस्यों की मौत हो गई थी.

वायुसेना का बेड़ा

लेकिन यह रूस में बना विमान था, जो कि भारतीय वायुसेना के बेड़े की रीढ़ है, इसके दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका ज्यादा है. वहीं मिग विमानों को उड़ता हुआ ताबूत या विधवा बनाने वाला कहा जाने लगा है.

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Image caption भारतीय वायुसेना के कुछ विमान 1960 के दशक के बने हुए हैं.

दो साल पहले तत्कालीन रक्षा मंत्री ने यह कहकर संसद को आश्चर्य में डाल दिया था कि रूस से ख़रीदे गए 872 मिग विमानों में से आधे से अधिक दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं. इसमें दो सौ लोगों की जान गई है.

पायलटों की शिकायत रही है कि मिग विमानों के कुछ मॉडल बहुत तेज़ी से लैंड करते हैं और कॉकपिट की खिड़कियों की डिज़ाइन ऐसी है कि उनसे वो रनवे को ठीक से नहीं देख पाते हैं.

भारतीय वायुसेना धीरे-धीरे अपने पुराने विमानों को हटा रही है, इनमें से कुछ तो 1960 के दशक के हैं.

सुरक्षा को ख़तरा

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अभी इसी महीने वायुसेना प्रमुख ने कहा था कि पुराने विमानों को हटाने में देरी से भारत की सुरक्षा को ख़तरा है, क्योंकि बेड़े का कुछ हिस्सा पुराना पड़ चुका है.

वहीं भारत का क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी चीन अपनी मारक क्षमता बढ़ाने पर खर्च करने में लगातार आगे है.

भारत में बने लड़ाकू विमान अब भी काम के लिए तैयार नहीं हैं. फ़्रांस से 126 राफ़ेल लड़ाकू विमान खरीदने का सौदा दो साल पहले हुआ था. लेकिन उस पर मोलभाव अब भी जारी है.

कुछ लोगों का कहना है कि हालांकि भारत को इसकी ज़रूरत नहीं है.

फ़्रांस से सौदा

रक्षा विश्लेषक भरत कर्नाड चेतावनी भरे लहजे में कहते हैं कि अगर इसे अंततोगत्वा फ़्रांस से ख़रीदा गया तो यह चिंता का विषय होगा.

वायु सेना में प्रयोग किए जा रहे विविध विमानों की ओर इशारा करते हुए वो कहते हैं,''हमरी समस्या विविधता है. हमें अपना प्रशिक्षण और विमानों का रखरखाव मानकों के मुताबिक़ करना होगा.''

रूसियों पर विमानों के स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति में देरी का आरोप लगता रहा है. भारत अब दुनिया में हथियारों को सबसे बड़ा आयातक है. वह हथियारों के लिए तेज़ी से पश्चिम की ओर देख रहा है. अमरीका अब उसका पहले नंबर का आपूर्तिकर्ता है.

कर्नाड कहते हैं कि भारत से राजनीतिक लाभ उठाने के लिए पश्चिमी देश महत्वपूर्ण स्पेयर पार्ट्स और सहयोग को रोक देंगे. उन्हें लगता है कि रूसियों के ऐसा करने की संभावना कम है.

लेकिन केवल वायुसेना नहीं है जो उपकरणों की समस्या का सामना कर रही है.

फ़ैसले लेने की प्रक्रिया

एक दिन पहले ही भारतीय नौसेना के एक पूर्व प्रमुख डीके जोशी ने रक्षा मंत्रालय पर निर्णय प्रक्रिया को निष्क्रिय बनाने के आरोप लगाए थे. उनका कहना था कि वो पनडुब्बी के लिए एक सेट बैटरी का आर्डर भी नहीं दे सकते हैं.

पिछले साल पनडुब्बियों के हादसे में हुई 18 नौसैनिक की मौत के बाद एडमिरल डीके जोशी ने इस्तीफ़ा दे दिया था. उनका इस्तीफा सुर्खिंयां बना था. जो पनडुब्बी हादसे का शिकार हुई वो रूस में बनी थी.

नए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना के आधुनिकिकरण और भारत को सुपरपॉवर बनाने का वादा किया है.

सोसाएटी ऑफ़ पॉलिसी स्टडीज़ के लिए काम करने वाले और सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी उदय भास्कर कहते हैं कि यह एक पुरानी चुनौती है.समस्याओं का समाधान ढूंढ़ने से हर भारतीय नेता आसानी से बचकर निकल जाता है.

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