क्या हुआ हज़ारों गुमशुदा बच्चों का?

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लापता बच्चों को तलाशने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए छत्तीसगढ़ और बिहार के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशकों को 30 अक्तूबर को पेश होने का आदेश दिया.

कोर्ट ने इन सभी को यह बताने को कहा है कि लापता बच्चों की खोज से जुड़े उसके दिशानिर्देशों पर उन्होंने अब तक अमल क्यों नहीं किया.

(इस मुद्दे पर विभिन्न रिपोर्टें सुनने के लिए 17 अक्तूबर का नमस्कार भारत ज़रुर सुनें. यह ऑडियो अगले 24 घंटे ही उपलब्ध रहेगा)

लेकिन जिन परिवारों के बच्चे लापता होते हैं उन्हें सबसे ज़्यादा सरकार और प्रशासन से निराशा होती है.

मामला

कोर्ट ने गुरुवार को यह आदेश ग़ैर सरकारी संस्था 'बचपन बचाओ आंदोलन' की तरफ से लापता बच्चों का पता लगाने में राज्य सरकारों की तरफ से उठाए गए 'अपर्याप्त कदमें' से जुड़ी याचिका पर दिया है.

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'बचपन बचाओ आंदोलन' के वकील भुवन रिभु ने बीबीसी को बताया, "संगठन की याचिका पर 10 मई 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला दिया था कि हर बच्चे के ग़ायब होने पर एफ़आईआर दर्ज होनी चाहिए और हर थाने में एक विशेष जुवेनाईल पुलिस अधिकारी हो. इसका पालन नहीं हो रहा था. इसलिए कोर्ट ने सितंबर 2014 में राज्यों को मौका दिया था कि 16 अक्तूबर तक पूरी जानकारी दें. शुरुआत छत्तीसगढ़ और बिहार से हुई है."

बिहार के अपराध अनुसंधान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस साल जून तक 621 बच्चों के लापता होने के मामले दर्ज हुए.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के पालन के बारे में बिहार सीआईडी के आईजी ने अरविंद पांडे ने बीबीसी को बताया, "कोर्ट के निर्देश का पालन करने के लिए कार्रवाई की गई है. इसमें विशेष किशोर पुलिस इकाई और मानव व्यापार निरोधक इकाई की स्थापना आदि शामिल है. लापता बच्चों के मामले में सूचना मिलने पर प्राथमिकी दर्ज की जा रही है."

परिवार का दुख

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लेकिन जिन परिवारों के बच्चे लापता हुए हैं, उन्हें सरकार और प्रशासन से सबसे ज़्यादा निराशा है.

बिहार में साल 2007 में पटना में आकाश नाम के बच्चे का अपहरण हो गया था.

आकाश की मां अंजू पांडे कहती हैं, "उस वक्त तो नीतिश कुमार बहुत बोले थे कि आपके बच्चे की खोज करवाएंगे, एक लाख रुपये ईनाम की घोषणा की थी. लेकिन 2007 में लापता बच्चों की सूची में मेरे बच्चे का नाम हटा दिया गया है और जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों की ट्रांसफर कर दिया जाता है. क्या पता है क्या राज़ है, सबसे भरोसा उठ गया है."

छत्तीसगढ़ के लोकायुक्त ने कहा था कि पिछले महीने तक साढ़े छह हज़ार बच्चों के लापता होने की शिक़ायतें उन्हें मिली है.

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